सेकी बेस कैंप में ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन, 27 मई को ग्रामसभा में पेश होगा सीएसआर का लेखा-जोखा

Ranchi News: रांची के गेतलसूद में निर्माणाधीन सोलर पावर परियोजना को लेकर ग्रामीणों ने सेकी बेस कैंप में प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने सीएसआर फंड में गड़बड़ी, बिचौलियों के दखल और विस्थापितों की अनदेखी का आरोप लगाया. 27 मई को ग्रामसभा में सीएसआर खर्च का पूरा लेखा-जोखा पेश किया जाएगा. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

अनगड़ा से जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड के रांची जिले के गेतलसूद डैम क्षेत्र में निर्माणाधीन सोलर पावर परियोजना को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया है. शनिवार को गेतलसूद स्थित सेकी के बेस कैंप में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी के सीएसआर फंड का दुरुपयोग किया गया है और फर्जी बिल बनाकर बड़ी राशि का गबन किया गया है. प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्थानीय विकास, विस्थापितों के अधिकार और रोजगार में पारदर्शिता की मांग उठाई. आंदोलन के बाद कंपनी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच वार्ता हुई, जिसमें 27 मई को ग्रामसभा के समक्ष सीएसआर मद का पूरा हिसाब पेश करने पर सहमति बनी.

विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शन

ग्रामीणों ने ‘विस्थापित संघर्ष समिति’ के बैनर तले सेकी बेस कैंप में विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परियोजना शुरू होने के बाद से स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सीएसआर फंड का उपयोग क्षेत्रीय विकास के बजाय गलत तरीके से किया गया. उनका कहना था कि कई योजनाओं में फर्जी बिल बनाकर राशि की निकासी की गई है, जबकि जमीन पर विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं.

दलाल और बिचौलियों का बढ़ा दखल

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना में स्थानीय मजदूरों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है. उनका आरोप था कि कार्यों में दलाल और बिचौलिये हावी हैं, जिससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों ने मांग की कि मजदूरों को सीधे कंपनी से जोड़ा जाए और उनका भुगतान डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से किया जाए. साथ ही मजदूरों को ईपीएफ समेत अन्य श्रमिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई.

प्रबंधन को सौंपा गया पांच सूत्री ज्ञापन

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सेकी के प्रबंधक पल्लव यदू को पांच सूत्री मांग पत्र सौंपा. ज्ञापन में स्थानीय विकास और पारदर्शिता से जुड़ी कई अहम मांगें शामिल थीं. ग्रामीणों ने मांग की कि गेतलसूद पंचायत और प्रभावित क्षेत्रों को सोलर पावर प्लांट से सीधे जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय लोगों को बिजली का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके. इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सीएसआर फंड से गेतलसूद स्वास्थ्य उपकेंद्र में ओपीडी और अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे जैसी जांच मशीनों की व्यवस्था करने की मांग की गई.

+2 स्कूल भवन निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई. ज्ञापन में गेतलसूद उच्च विद्यालय में 10+2 स्कूल भवन निर्माण की मांग रखी गई. ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा सुविधा उपलब्ध होगी, तो गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को बड़ा लाभ मिलेगा.

27 मई को ग्रामसभा में रखा जाएगा पूरा हिसाब

ग्रामीणों के उग्र विरोध के बाद कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता हुई. बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि 27 मई को ग्रामसभा के समक्ष सीएसआर मद से किए गए कार्यों का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाएगा. ग्रामीणों ने कहा कि वे सीएसआर फंड में पारदर्शिता चाहते हैं और ग्रामसभा के माध्यम से हर खर्च का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

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बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीण

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला और पुरुष शामिल हुए. मौके पर ग्राम प्रधान जितेंद्र उरांव, अजय उरांव, सूरज उरांव, कृष्णा महतो, जगेश्वर महतो, गौरीशंकर मुंडा, हरिनंदन गोस्वामी, राजेश लोहरा, बिट्टू उरांव, चंदन गोस्वामी, विवेक गोस्वामी, सुधीर महतो, राजन महतो और गणेश करमाली समेत कई लोग मौजूद थे. ग्रामीणों ने एकजुट होकर स्थानीय अधिकार, रोजगार और विकास को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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