रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची की दुष्कर्म के बाद निर्मम हत्या के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले को अदालत ने पहले ही गंभीर मानते हुए स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था. मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ में हुई. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में बच्ची की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट और एफएसएल जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. खंडपीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 11 मई की अगली तिथि निर्धारित की है.
सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी गई एफएसएल रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में सीलबंद लिफाफे में एफएसएल रिपोर्ट पेश की गई. रिपोर्ट में मृत बच्ची के कपड़े, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य और आरोपियों से संबंधित जांच सामग्री शामिल थी. इसके साथ ही बच्ची की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई. अदालत ने दोनों रिपोर्टों का अवलोकन किया और आगे की सुनवाई के लिए दस्तावेजों को रिकॉर्ड में शामिल किया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत लगातार इसकी निगरानी कर रही है. हाईकोर्ट ने पहले भी पुलिस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे.
24 मार्च को हुई थी बच्ची की हत्या
जानकारी के अनुसार 24 मार्च 2026 को विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी निर्मम हत्या कर दी गई. घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था. हालांकि मामले में प्राथमिकी 25 मार्च को दर्ज की गई, जिसे लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी. अदालत ने पूछा था कि इतनी गंभीर घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज करने में देरी क्यों हुई. साथ ही पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए थे.
तीन लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
घटना को लेकर विष्णुगढ़ थाना में कांड संख्या 42/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. मामले में अब तक तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गिरफ्तार आरोपियों में मृत बच्ची की मां रेशमी देवी और भीम राम समेत अन्य शामिल हैं. पुलिस का दावा है कि बच्ची की हत्या तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से जुड़े कारणों से की गई. जांच एजेंसियां इस पूरे मामले के हर पहलू की जांच कर रही हैं. पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मीडिया रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने बनाया था जनहित याचिका
इस जघन्य घटना को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों को हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका में परिवर्तित कर दिया था. अदालत ने कहा था कि यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है, इसलिए इसकी न्यायिक निगरानी जरूरी है. सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. हाईकोर्ट लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो.
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11 मई को होगी अगली सुनवाई
खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है. माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में एफएसएल रिपोर्ट और जांच की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हो सकती है. इस मामले ने पूरे झारखंड को झकझोर दिया है. बच्ची के साथ हुई बर्बर घटना को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है. फिलहाल हाईकोर्ट की निगरानी में मामले की जांच आगे बढ़ रही है और राज्य सरकार को नियमित रूप से अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश करनी पड़ रही है.
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