बाघ ने ली घर में एंट्री, डेढ़ घंटे तक थमी रहीं सांसें

जैसे ही तड़के 4:30 मरातू गांव में खबर फैली कि पूरन महतो के घर में बाघ आ गया है, लोगों को सहसा भरोसा ही नहीं हुआ. घटना आग की तरह फैल गयी.

सिल्ली/रांची. जैसे ही तड़के 4:30 मरातू गांव में खबर फैली कि पूरन महतो के घर में बाघ आ गया है, लोगों को सहसा भरोसा ही नहीं हुआ. घटना आग की तरह फैल गयी. देखते-देखते पूरे गांव में हजारों लोग जमा हो गये. कौतूहल का माहौल रहा. लोगों में डर भी था. इसके बावजूद वे बाघ की झलक पाने को आतुर रहे. घटना की सूचना मिलने के कुछ देर बाद ही वन विभाग की स्थानीय टीम भी आ गयी. टीम के सदस्यों ने पूरन महतो और उसके परिजनों से बात की. उनका कुशलक्षेम पूछा. इस समय तक वन विभाग भी बाघ होने की पुष्टि नहीं कर रहा था. कोई घर तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. बाद में कुछ युवकों ने घर के अंदर जाकर बाघ की तस्वीर ली. इसके बाद वन विभाग की टीम ने माना कि लगता है यह बाघ ही है. इससे पहले लोग कयास लगा रहे थे कि वह बाघ है, लकड़बग्गा है या कोई अन्य बड़ी बिल्ली जैसा जानवर. शुरुआत में वन विभाग के अधिकारी भी आश्वस्त दिखे कि यह बाघ तो बिल्कुल नहीं हो सकता. लेकिन जब एक्सपर्ट और विभाग ने फुटप्रिंट की जांच की, तब जाकर पक्का हो गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद रांची के ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर भी पहुंचे. उन्होंने विधि व्यवस्था संभालने की कोशिश की और स्थिति से जिला प्रशासन को अवगत कराया. इसके बाद प्रशासन ने वहां निषेधाज्ञा लगा दी. भीड़ नहीं लगाने की अपील की गयी, लेकिन लोग नहीं माने.

भीड़ से सहयोग की अपील करते रहे वन अधिकारीधीरे-धीरे वहां लोगों की भीड़ बढ़ने लगी. लोग बाघ को एक नजर देखने के लिए उतावले हो गये. वन विभाग और प्रशासन की टीम सक्रिय हो गयी. कई लोग घर मालिक और उसके बच्चों की किस्मत और हिम्मत की सराहना करने लगे कि कैसे उन्होंने बाघ को घर में बंद कर दिया. कुछ लोग बाघ के रेस्क्यू की प्रक्रिया को लेकर पूरे दिन कौतूहल में खड़े रहे. जैसे ही रेस्क्यू टीम पहुंची, भीड़ और भी उतावली हो गयी. प्रशासन और विभाग लगातार भीड़ से सहयोग की अपील करते रहे. लोगों ने धैर्य से रेस्क्यू में सहयोग किया. करीब डेढ़ घंटे बाद जब रेस्क्यू पूरा हुआ, तो वन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली.

बच्चों ने भी दिखायी हिम्मत

पूरन महतो उर्फ पुनवा महतो ने बताया कि जैसे ही बाघ घर में घुसा, कुछ समझ में नहीं आया. लेकिन हिम्मत से काम लिया. बच्चों ने भी हिम्मत दिखायी. जब बाघ खुद ही दूसरे कमरे में चला गया, तो हमने हिम्मत से काम लेते हुए घर से निकलकर दरवाजा बंद कर दिया.

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Published by: Praveen

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