डीएमएफटी फंड की गड़बड़ी पर सीएम हेमंत सोरेन सख्त, सभी जिलों में होगी जांच

DMFT Fund Irregularity: डीएमएफटी फंड में कथित गड़बड़ी पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों में जांच के आदेश दिए हैं. वित्त विभाग ने उपायुक्तों से योजनाओं और खर्च का विस्तृत ब्योरा मांगा है. खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित राशि के उपयोग की समीक्षा और विशेष ऑडिट कराया जाएगा. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट

DMFT Fund Irregularity: झारखंड के जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के उपयोग में हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड सरकार एक्शन मोड में आ गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इससे संबंधित आदेश जारी किया है. सीएम के आदेश के बाद वित्त विभाग ने खान एवं भूतत्व विभाग को कड़ा निर्देश दिया है. सरकार अब इस बात की तहकीकात कराएगी कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए सुरक्षित रखे गए करोड़ों रुपये का इस्तेमाल कहां-कहां हुआ है? कहीं पैसों का इस्तेमाल फिजूलखर्ची में तो नहीं हो रहा है? डीएमएफटी के तय मापदंडों के अनुसार राशि खर्च की गई या नहीं?

प्रभात खबर की मुहिम

डीएमएफटी फंड की गड़बड़ी को लेकर प्रभात खबर लगातार मामला उठाता रहा है. डीएमएफटी फंड के खर्च में राज्य के कई जिलों ने नियम-कानून को ताख पर रख दिया. खनन प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित और प्रभावित लोगों के विकास व बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसे खर्च किए जाने थे. मामला प्रकाश में आने के बाद वित्त विभाग ने इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिये थे. मुख्य सचिव के माध्यम से यह फाइल मुख्यमंत्री तक पहुंची, जिसके बाद अब व्यापक समीक्षा और ऑडिट का रास्ता साफ हो गया है.

उपायुक्तों को देना होगा ब्योरा

वित्त सचिव ने साफ कर दिया है कि जिलास्तर पर उपायुक्तों को डीएमएफटी की बैठकों, योजनाओं की वर्तमान स्थिति और खर्च का पूरा तथ्यात्मक विवरण सदस्यों के सामने रखना होगा. इन रिपोर्टों की समीक्षा निदेशक (खान) के स्तर पर की जायेगी. यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो वित्त विभाग संबंधित जिलों में विशेष ऑडिट कराने का निर्णय लेगा.

राधाकृष्ण किशोर जताई थी आपत्ति

विभागीय वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पीत पत्र के माध्यम से डीएमएफटी मद की राशि के अपव्यय पर कड़ी आपत्ति जताई थी. सरकार का मानना है कि यह पैसा खनन प्रभावित क्षेत्रों के गरीब लोगों के कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए है. इसे प्रशासनिक सुख-सुविधाओं या नियमविरुद्ध कार्यों में खर्च करना गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है. प्रशासी विभाग यानी खान एवं भूतत्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह जल्द से जल्द राज्य में डीएमएफटी योजनाओं के क्रियान्वयन की वस्तुस्थिति सरकार के सामने पेश करे. खासकर, उन जिलों में जहां डीएमएफटी फंड के बेजा इस्तेमाल की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं.

जांच के दायरे में होंगे ये तीन मुख्य बिंदु

वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार, सभी जिलों के उपायुक्तों द्वारा स्वीकृत और पूर्ण की गई योजनाओं की समीक्षा तीन प्रमुख मानकों पर की जाएगी.

  • प्रक्रिया का पालन: क्या योजनाओं का चयन डीएमएफटी गाइडलाइंस के अनुरूप सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति और वित्त विभाग के टेंडर नियमों का पालन करते हुए किया गया है.
  • वित्तीय अनियमितता: क्या योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की भौतिक या वित्तीय गड़बड़ी बरती गई है.
  • ऑडिट की स्थिति: क्या डीएमएफटी नियमावली की कंडिका 19 के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा नियमित ऑडिट कराया जा रहा है.

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किस-किस तरह की हुई गड़बड़ी

  • डीएमएफटी के पैसे से कोरोना काल में डॉक्टरों का वेतन बांटा गया.
  • डीएमएफटी फंड से उपायुक्तों ने अपने बंगलों की साज-सज्जा करायी. समाहरणालय भवन के निर्माण में भी राशि खर्च की गयी.
  • डीएमएफटी फंड से जिम बनाने की स्वीकृति दी गयी.
  • डीएमएफटी फंड से कोरोना काल में पंपलेट और होर्डिंग पर 10 करोड़ रुपये खर्च किये गये.
  • डीएमएफटी फंड से गैर-खनन प्रभावित क्षेत्रों में भी कार्य कराये गये.
  • डीएमएफटी फंड से कई जिलों में ऊंची दरों पर खरीदारी की भी शिकायतें मिली.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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