AI के दौर में Research Ethics पर जोर, रांची में प्रो स्वाति पाराशर ने शोधकर्ताओं को दी बड़ी सीख

डीएसपीएमयू में शोध नैतिकता और ज्ञान उत्पादन पर चर्चा। प्रो स्वाति पाराशर ने शोध में स्थानीय सहयोग और मौलिकता के महत्व पर जोर दिया।

रांची. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) के मानव विज्ञान विभाग और आइक्यूएसी की ओर से शुक्रवार को गांधी सभागार में ‘प्रवाह’ के तहत विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया. ‘ज्ञान उत्पादन में शोध नैतिकता की भूमिका’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ग्लोबल स्टडीज की प्रो स्वाति पाराशर ने शोध के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की.

प्रो स्वाति पाराशर ने आदिवासी समुदायों, महिलाओं और संघर्ष प्रभावित समूहों पर शोध के दौरान शोधकर्ताओं की जिम्मेदारियों और नैतिक पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया. उन्होंने एआइ के दौर में लेखन की मौलिकता और भारतीय संदर्भ से जुड़े शोध पर भी जोर दिया.

उन्होंने कहा कि शोध नैतिकता केवल साहित्यिक चोरी की जांच या सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है. शोध से तैयार ज्ञान का स्वामित्व किसके पास रहेगा, इस पर भी गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने शोध प्रकाशन में स्थानीय सहयोगकर्ताओं को भी उचित श्रेय और नाम दिए जाने की जरूरत बतायी.

कुलपति प्रो राजीव मनोहर ने कहा कि एनइपी 2020 के तहत शोध की गुणवत्ता और वैश्विक मानकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है. डॉ अभय सागर मिंज ने शोध कर रहे छात्रों से नवाचार को अपनाने की अपील की. डॉ एसएम अब्बास ने कहा कि नैतिक आधार के बिना कोई भी शोध मूल्यहीन है.

कार्यक्रम के दौरान डॉ अश्विन शर्मा ने प्रयोगशाला से जुड़े अनुभव साझा किए. वहीं शोधार्थी दीक्षा सिंह, सलमा टुडू और विवेक कुमार भगत ने फील्ड वर्क से जुड़े अपने अनुभव प्रस्तुत किए.

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By संजीव कुमार

संजीव कुमार सिंह, वर्तमान में प्रभात खबर, रांची में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. वह 14 वर्षों (2005 से 2019) तक प्रभात खबर रांची में मुख्य संवाददाता रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 29 वर्षों का अनुभव है. लंबे पत्रकारिता जीवन में खोजी, विश्लेषणात्मक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण रिपोर्टें प्रकाशित की हैं. प्रभात खबर द्वारा बेस्ट रिपोर्टर का अवार्ड भी दिया गया. इनकी विशेष पहचान झारखंड के उच्च शिक्षा तंत्र, विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नियुक्तियों व प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के लिए रही है. झारखंड लोक सेवा आयोग के गठन के बाद सिविल सेवा, व्याख्याता, इंजीनियर, जैसी नियुक्तियों में गड़बड़ी को उजागर किया.

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