रांची. दिगंबर जैन भवन, हरमू रोड में पर्युषण महापर्व के अष्टम एवं अंतिम दिवस क्षमा दिवस श्रद्धा और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया. श्री साधुमार्गी जैन संघ रांची की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में क्षमा और आत्मशुद्धि का संदेश दिया गया.
स्वाध्यायी पुष्पा ओसवाल ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान महावीर ने कहा है, "क्षमा वीरस्य भूषणम्", अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है. उन्होंने कहा कि वही व्यक्ति सच्चे अर्थों में क्षमा कर सकता है, जिसमें अपने क्रोध, अहंकार और प्रतिशोध की भावना पर विजय पाने का साहस हो. क्षमा दुर्बलता नहीं, बल्कि आत्मबल और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है.
इस अवसर पर अंतकृद्दशांग सूत्र के वाचन का समापन हुआ. स्वाध्यायी पुष्पा ओसवाल ने चंदनबाला के जीवन का प्रेरणादायक प्रसंग भी सुनाया. उन्होंने कहा कि पर्युषण केवल आठ दिनों का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का अवसर है. व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ को पहचान कर उनसे मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए. क्षमा दिवस की वास्तविक सार्थकता मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगने और दूसरों को हृदय से क्षमा करने में है.
संध्याकाल में सामूहिक सांवत्सरिक प्रतिक्रमण का आयोजन किया गया. 16 सितंबर को जैन भवन में सुबह 10 बजे से स्वाध्यायी पुष्पा ओसवाल का विदाई समारोह और क्षमावाणी कार्यक्रम होगा. तेरापंथ युवक परिषद की ओर से रक्तदान शिविर भी लगाया जाएगा.
कार्यक्रम में छोटे लाल चौरड़िया, केसर देवी पींचा, मूलचंद सुराणा, हुक्मीचंद चोरड़िया, विकास सुराणा, विनोद बेंगानी, माणिक बोथरा, सुमित बैंगानी आदि मौजूद थे.
