CyberPeace: रांची के लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल में साइबरपीस की ओर से स्टॉप साइबर ट्रैफिकिंग– जागरूकता, कार्रवाई और सशक्तिकरण विषय पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन खतरों और डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के तरीकों की जानकारी देना था.कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई. इस दौरान साइबरपीस की प्रतिनिधि प्रियंका जैन ने संगठन के संस्थापक एवं ग्लोबल प्रेसिडेंट मेजर विनीत कुमार का परिचय कराया. उन्होंने साइबर सुरक्षा जागरूकता और सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने में मेजर विनीत कुमार के योगदान पर प्रकाश डाला.
सत्र को संबोधित करते हुए मेजर विनीत कुमार ने छात्रों को साइबर अपराधों और इंटरनेट से जुड़े बढ़ते खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि स्मार्टफोन, सीसीटीवी कैमरे, वाई-फाई राउटर और अन्य स्मार्ट डिवाइस यदि सुरक्षित नहीं रखे जाएं तो साइबर हमलों का शिकार बन सकते हैं. कार्यक्रम में पासवर्ड सुरक्षा, फिशिंग, ऑनलाइन ठगी, फर्जी नौकरी के ऑफर, साइबर बुलिंग, रैंसमवेयर, पहचान की चोरी, डीपफेक और सोशल मीडिया पर गोपनीयता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई. छात्रों को मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने और ऑनलाइन सतर्क रहने की सलाह दी गई.
सत्र का मुख्य आकर्षण साइबर ट्रैफिकिंग और ऑनलाइन शोषण पर चर्चा रही. छात्रों को बताया गया कि अपराधी सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी नौकरी या मॉडलिंग ऑफर के जरिए लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं. उन्हें किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अभिभावकों या शिक्षकों को देने के लिए प्रेरित किया गया. छात्रों को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, साइबर हेल्पलाइन 1930 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 जैसी सेवाओं की जानकारी भी दी गई. इसके अलावा एआई आधारित ठगी, वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक तकनीक से जुड़े खतरों पर भी चर्चा की गई.
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए. मेजर विनीत कुमार ने उन्हें अपने परिवार और समाज में साइबर सुरक्षा जागरूकता फैलाने के लिए ‘साइबर सुरक्षा एंबेसडर’ बनने का आह्वान किया. अंत में स्कूल प्रशासन ने मेजर विनीत कुमार, साइबरपीस टीम और सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया. यह सत्र छात्रों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए आवश्यक जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने में सफल रहा. साइबर सुरक्षा जागरूकता सत्र छात्रों को ऑनलाइन खतरों और टेक्नोलॉजी से जुड़े मानव तस्करी का सामना करने के लिए सशक्त बनाता है.
