Political news : अर्थव्यवस्था को गति देने में गो माताओं का अहम योगदान : राधाकृष्ण किशोर

गो सेवा के क्षेत्र में उभरती चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर कार्यशाला

रांची. गो माताओं से हमारी अर्थव्यवस्था व संस्कृति विकसित होती रही है. हर भारतीय के मन में अपने देश के लिए जितना प्रेम रहता है, उतना ही प्रेम गो माताओं के प्रति भी रहता है. दुनिया की जितनी सभ्यताएं रही हैं, उनके विकास में गो माताओं का अहम योगदान रहा है. उक्त बातें वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कही. वे गुरुवार को झारखंड गो सेवा आयोग के तत्वावधान में पारिस्थितिकीय संतुलन एवं आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में गो सेवा के क्षेत्र में उभरती चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर पशुपालन भवन हेसाग में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे.

राज्य में जरूरत के हिसाब से दूध नहीं

वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने कई देशों के विकास क्रम को भी देखा. इन देशों के आर्थिक विकास में सबसे बड़ा योगदान पशुधन का है. जब से हेमंत सोरेन सरकार आयी, इस दिशा में पहल हुई है. राज्य में जरूरत के हिसाब से दूध नहीं है. अगले तीन चार वर्षों में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 300-450 ग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य है. इसको लेकर उन्होंने गो सेवा आयोग को पशुपालन विभाग के साथ मिलकर प्रस्ताव देने को कहा और अगले बजट में उसे स्वीकृत किये जाने का भरोसा दिलाया. मौके पर सुनील मानसिंह, डॉ सत्यप्रकाश, डॉ मुकेश मिश्रा, डॉ प्रभात पांडेय, डॉ जय तिवारी, अनिल मोदी आदि थे.

गोशालाओं को ढाई करोड़ का अनुदान दिया गया : कृषि मंत्री

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कृषि, पशुपालक एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मनुष्य से प्रेम आम बात हो सकती है, पर पशु से प्रेम व्यक्ति के व्यवहार और सोच को दर्शाता है. झारखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जो पशुओं के लिए प्रतिदिन 100 रुपये आहार के नाम पर भुगतान करता है. जबकि, देश के अन्य राज्यों में यह राशि 30 से 40 रुपये है. पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य के निबंधित गोशालाओं को ढाई करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है. गोशाला में तैयार बायो फर्टिलाइजर की खरीद का प्रस्ताव सरकार के पास है.

गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की हो रही पहल

आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार में अब गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की भी पहल हो रही है. झारखंड गो ग्राम ऐसा ही प्रयास है. अभी प्रारंभिक तौर पर 5500 महिलाओं को प्रशिक्षित करने का प्रयास हो रहा है, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके. आयोग के उपाध्यक्ष राजू गिरी ने कहा कि महिलाओं को प्रशिक्षण देकर गोबर से दीप, अगरबत्ती तैयार कराये जा रहे हैं. सचिव अबु बकर सिद्दीक ने कहा कि इको सिस्टम को मजबूत करने में पशुधन का भी महत्व है. पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ वल्लभभाई कथीरिया ने कहा कि देश में गोमूत्र, गोबर का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है. मेडिकल साइंस की रिपोर्ट में इसके जरिये कई असाध्य बीमारियों के ईलाज, प्राकृतिक खेती का जिक्र हो रहा है.

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Published by: Rajiv kumar

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