प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट
रांचीः मसीही विश्वासियों ने रविवार को माताओं की संरक्षिका संत मोनिका का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया. इस अवसर पर पुरुलिया रोड स्थित संत मरिया महागिरजाघर में सुबह 8 बजे विशेष मिस्सा (आराधना) का आयोजन किया गया. मुख्य अनुष्ठाता बिशप आनंद डेविड थे. मिस्सा में बड़ी संख्या में मसीही विश्वासी शामिल हुए और संत मोनिका की मध्यस्थता से प्रार्थना की.
प्रार्थना और धैर्य की मिसाल हैं संत मोनिका
मिस्सा के दौरान अपने उपदेश में बिशप आनंद डेविड ने संत मोनिका के जीवन और उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि मोनिका एक साधारण महिला थीं. उनके पति, सास-ससुर और तीन बच्चे थे. उनका एक पुत्र गलत रास्ते पर चला गया था. उन्होंने कहा कि पुत्र के जीवन को लेकर मोनिका ने लंबे समय तक दुख सहा. वह अपने पुत्र के लिए रोती थीं, लगातार प्रार्थना करती थीं और करीब 17 वर्षों तक धैर्य के साथ उसके बदलाव की प्रतीक्षा करती रहीं. उनके त्याग, प्रार्थना और विश्वास का प्रभाव उनके पुत्र के जीवन पर पड़ा.
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मां की प्रार्थना से बदला पुत्र का जीवन
बिशप आनंद डेविड ने कहा कि जब मोनिका के पुत्र को अपनी मां के कष्ट, त्याग और प्रार्थना से भरे जीवन का एहसास हुआ, तो उसके भीतर पश्चाताप की भावना जागी और उसका जीवन बदल गया. आगे चलकर वही पुत्र संत अगुस्तीन के नाम से प्रसिद्ध हुआ. उन्होंने कहा कि ईश्वर के वचन पर अटूट विश्वास और निरंतर प्रार्थना के कारण मोनिका स्वयं भी संत मोनिका के नाम से जानी गईं. उनका जीवन माताओं के लिए धैर्य, त्याग, विश्वास और प्रार्थना की प्रेरणा देता है.
संत मोनिका से प्रेरणा लेने का आह्वान
बिशप ने कहा कि आज भी विश्वासी संत मोनिका की मध्यस्थता से प्रार्थना करते हैं और उनसे प्रेरणा प्राप्त करते हैं. उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि कठिन परिस्थितियों में भी विश्वास और प्रार्थना का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए. संत मोनिका की मध्यस्थता से ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने की कामना के साथ विश्वासियों ने विशेष प्रार्थना की. मिस्सा में संत मरिया महागिरजाघर के पल्ली पुरोहित फादर अनिल कुजूर सहित बड़ी संख्या में विश्वासी उपस्थित थे.
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