रांची. कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा है कि भारत सरकार पशुओं की गणना करती है, लेकिन धार्मिक आधार पर आदिवासियों की गणना कर पहचान नहीं देना चाहती है. आदिवासियों के पाहन, पुजारी व धर्मस्थल को महत्व नहीं देना चाहती. श्री भगत ने कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि केंद्र सरकार आदिवासियों के प्रति घृणा का भाव रखती है. आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन करती है. जनगणना फॉर्म के कॉलम में 90 लाख लोगों ने अन्य धर्म का उल्लेख किया था. उनमें से 50 लाख लोगों ने सरना धर्म लिखा था. परंतु, सुनियोजित षड्यंत्र के तहत आदिवासियों का धार्मिक अस्तित्व मिटाने के लिए जनगणना फॉर्म से इस बार अन्य का कॉलम हटा दिया गया है.
देश में आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 15 करोड़
श्री भगत ने कहा कि देश में आदिवासियों की जनसंख्या लगभग 15 करोड़ है. देश में रहने वाले 40 लाख जैन, 80 लाख बौद्ध व दो करोड़ सिख समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाता है. लेकिन, प्रकृति पूजक आदिवासियों की धार्मिक पहचान, आस्था व परंपरा गौण कर दी गयी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2014 के घोषणा पत्र में सरना धर्म कोड देने का वादा किया था. सरना धर्म कोड पर उन्होंने झारखंड विधानसभा में प्रश्न किया. संसद में भी सवाल उठाया. लेकिन, भाजपा सरकार खामोश रही. दरअसल, भाजपा सरकार आदिवासियों का विनाश चाहती है. भाजपा आदिवासियों को वनवासी बनाना चाहती है. सरना धर्म कोड को लेकर कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा.
कांग्रेस के संघर्ष ने भाजपा सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया
कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने कहा कि जातिगत जनगणना की मांग करने पर भाजपा जाति की बात करने वाले को लात देने की बात करती थी. लेकिन, राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के संघर्ष ने भाजपा सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया. जातिगत जनगणना के पहले आदिवासियों को अलग सरना धर्म कोड आवंटित करना होगा. सही जनगणना होने पर देश में जनजातीय समुदाय की संख्या 15 करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है. पूर्व विधायक जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि सिर्फ झारखंड ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान के आदिवासी अपनी धार्मिक पहचान चाहते हैं. फिर भी पांच वर्षों से केंद्र सरकार सरना कोड बिल को दबाये बैठी है. संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति, कमल ठाकुर, अभिलाष साहू, राजन वर्मा व राकेश किरण महतो उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
