कैरोटिड डॉपलर जांच से ब्रेन स्ट्रोक का पहले पता लगाना संभव

सिंगापुर से आये भारतीय मूल के डॉ विजय कुमार शर्मा ने बताया कि न्यूरोसोनोलॉजी (मस्तिष्क सोनोग्राफी या न्यूरोलॉजिकल अल्ट्रासाउंड ) मरीजों के इलाज में काफी मददगार साबित हो रही है.

रांची. सिंगापुर से आये भारतीय मूल के डॉ विजय कुमार शर्मा ने बताया कि न्यूरोसोनोलॉजी (मस्तिष्क सोनोग्राफी या न्यूरोलॉजिकल अल्ट्रासाउंड ) मरीजों के इलाज में काफी मददगार साबित हो रही है. कैरोटिड डॉपलर जांच (एक प्रकार का अल्ट्रासाउंड) द्वारा न्यूरोलॉजिस्ट ब्रेन स्ट्रोक के खतरा का पहले ही पता कर सकते हैं. इस जांच से यह पता चल जाता है कि गर्दन की आर्टरी (धमनी) से मस्तिष्क को खून कैसे पहुंच रहा है. आर्टरी में जमा कोलेस्ट्रॉल की जानकारी पहले होने से डॉक्टर उसका इलाज पहले कर लेते हैं. विदेशों में ऐसी जांच सामान्य बात हो गयी है. अब भारत के न्यूरोलॉजिस्ट भी इसका उपयोग करने लगे हैं. वह मिड टर्म नेशनल न्यूरोलॉजी मीट-2025 के समापन समारोह में बोल रहे थे. उन्होंने बताया कि ट्रांस क्रोनियल डॉपलर जांच से मस्तिष्क की आर्टरी का पता समय रहते किया जा सकता है. अहमदाबाद से आये डॉ अरविंद शर्मा ने बताया कि महिला चिकित्सकों के पास जैसे अल्ट्रासोनोग्राफी करने की सुविधा होती है, जिससे वह गर्भ में पल रहे शिशु की जानकारी कर लेते हैं, उसी तरह न्यूरोलॉजिस्ट भी न्यूरो सोनोग्राफी से बीमारी का पता खुद लगा लेते हैं. न्यूरोमस्क्युलर अल्ट्रासाउंड की जांच से नस और मांसपेशियों की जांच भी संभव हो गयी है. तकनीक का सहयोग अब इलाज में भी मिलने लगा है.

राज्य के डॉक्टरों के दक्ष होने से मरीजों को लाभ

आयोजन समिति के सचिव डॉ उज्जवल रॉय और अध्यक्ष डॉ अनिल कुमार ने बताया कि न्यूरोलॉजी मीट से राज्य के डॉक्टर भी दक्ष होंगे. इससे मरीजों के इलाज में भी लाभ मिलेगा. डॉ उज्ज्वल ने कहा कि एआइ के जमाने में डॉक्टरों को तकनीक रूप से दक्ष होना होगा. तकनीक का सहयोग लेकर मरीज को गुणवत्तापूर्ण इलाज किया जा सकता है. तीन दिन तक चले सेमिनार में देश और दुनिया के कई डॉक्टर शामिल हुए. उन्होंने अपने शोध और जानकारी को एक दूसरे से साझा किया.

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Published by: Praveen

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