Video: रांची में दुर्लभ ब्लैक कोबरा के साथ हैवानियत, दुर्लभ प्रजाति के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

Black Cobra Rescue Ranchi: रांची के हवाई अड्डा क्षेत्र में शुक्रवार की दोपहर, करीब 2 बजे, एक घटना ने सबका ध्यान खींचा. एक दुर्लभ ब्लैक कोबरा, जो झारखंड की धरती पर शायद ही देखा जाता हो, घायल और असहाय अवस्था में सड़क किनारे पड़ा था. इसे मृत समझकर फेंक दिया गया था, लेकिन रांची के मशहूर सर्पमित्र रमेश महतो की सूझबूझ और संवेदनशीलता ने इस प्राणी को नया जीवनदान दिया. रमेश ने न केवल इस कोबरा को सुरक्षित पकड़ा, बल्कि इसके पीछे की दर्दनाक कहानी को भी उजागर किया.

Black Cobra Rescue Ranchi: सर्पमित्र रमेश महतो ने बताया कि यह ब्लैक कोबरा भारतीय नाग की एक दुर्लभ उपप्रजाति है, जो झारखंड में केवल पलामू क्षेत्र में ही देखने को मिलती है. रांची जैसे शहरी इलाके में इसका मिलना संदेह पैदा करता है. जांच के बाद पता चला कि यह सांप सपेरों की क्रूरता का शिकार बना था. इसके विषदंत और विषग्रंथि को बेरहमी से निकाल दिया गया था, जिसके चलते यह चलने-फिरने और जीवित रहने की स्थिति में भी नहीं था. रमेश का मानना है कि इसे बाहर से लाया गया और फिर घायल अवस्था में लावारिस छोड़ दिया गया.

सपेरों की हैवानियत, चंद सिक्कों की खातिर सांपों के साथ क्रूरता

सर्पमित्र रमेश ने सांपों के साथ होने वाली क्रूरता की कड़वी सच्चाई को सामने रखा. उन्होंने बताया कि सपेरे चंद पैसों की लालच में सांपों के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर देते हैं. सांपों के विषदंत तोड़ दिए जाते हैं, उनकी विषग्रंथि को ब्लेड या धारदार औजारों से काटकर निकाल लिया जाता है, ताकि वे किसी को नुकसान न पहुंचा सकें. इतना ही नहीं, इन सांपों को कई दिनों तक भूखा रखा जाता है, जिससे वे कमजोर होकर आसानी से नियंत्रित हो सकें. फिर इन्हें पेटी में कैद कर ‘नाग देवता’ के नाम पर गली-गली घूमकर पैसे इकट्ठे किए जाते हैं. रमेश ने बताया कि भूख की वजह से सांप दूध तक पी लेते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. जब सांप मरने की कगार पर पहुंच जाते हैं, तो सपेरे उन्हें कहीं भी फेंककर चले जाते हैं. यह ब्लैक कोबरा भी ऐसी ही क्रूरता का शिकार था.

सर्पमित्र रमेश महतो

इलाज और संरक्षण की उम्मीद

रमेश ने इस कोबरा को न केवल रेस्क्यू किया, बल्कि इसका इलाज करने का भी संकल्प लिया. उनका कहना है कि पहले सांप को स्वस्थ किया जाएगा, और फिर उसे किसी सुरक्षित प्राकृतिक स्थान पर छोड़ा जाएगा, जहां वह स्वतंत्र रूप से जी सके. उनकी यह कोशिश न केवल एक सांप को बचाने की है, बल्कि प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने की भी है.

ब्लैक कोबरा

सर्पमित्र की भावुक अपील: सांपों के अस्तित्व को बचाएं

रमेश महतो ने आम लोगों से एक भावनात्मक और जागरूक अपील की है. उन्होंने कहा कि सांपों का अस्तित्व आज खतरे में है. सपेरों को पैसे देकर या उनके इस क्रूर व्यवसाय को बढ़ावा देकर हम अनजाने में सांपों की प्रजातियों को नष्ट होने की ओर धकेल रहे हैं. उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि यदि कहीं सपेरे सांपों के साथ दिखें या पैसे मांगते नजर आएं, तो उनकी शिकायत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन से करें. “धर्म और आस्था अपनी जगह है, लेकिन हमें अंधविश्वास के नाम पर सांपों की जिंदगी से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देनी चाहिए. सांप पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. इनका बचे रहना हमारी धरती के लिए जरूरी है.”

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >