Jharkhand : झारखंड के बार, लाउंज और रेस्तरां ऐसे तोड़ रहे हैं नियम

Jharkhand : राजधानी रांची समेत झारखंड के विभिन्न जिलों में मौजूद बार, लाउंज और रेस्तरां निर्धारित ब्लू प्रिंट ताक पर रखते हैं. यहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है. पढ़ें ये खास रिपोर्ट

Jharkhand : राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न जिलों में चल रहे बार, लाउंज और रेस्तरां में आये दिन नियमों की अनदेखी के मामले सामने आते हैं. नियमानुसार बार, लाउंज और रेस्तरां संचालन के लिए रात 12:00 बजे तक का समय निर्धारित है. लेकिन, कई जगहों पर समय-सीमा का पालन नहीं किया जाता है. विभागीय जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है.

बार, लाउंज और रेस्तरां संचालन के लिए प्रस्तावित स्थल का विभाग की ओर से अनुमोदित ब्लू प्रिंट (नक्शा) होना अनिवार्य होता है. इसमें इसकी पूरी जानकारी होती है कि बार, लाउंज और रेस्तरां के संचालन का स्वरूप क्या होगा. कितने काउंटर होंगे. इसमें लोगों के बैठने के लिए टेबल से लेकर अन्य सुरक्षा मानकों की पूरी जानकारी होती है. उत्पाद विभाग की टीम की ओर से पूर्व में की गयी जांच में यह बात सामने आयी है कि कई बार, लाउंज और रेस्तरां संचालन में अनुमोदित ब्लू प्रिंट के अनुरूप क्षेत्र का उपयोग नहीं किया जाता है, जो हादसे का प्रमुख कारण है.

जांच में पाया गया फर्जी नक्शा

विभाग की ओर से समय-समय पर की गयी जांच में फर्जी ब्लू प्रिंट के आधार पर बार, लाउंज और रेस्तरां के संचालन का मामला सामने आया है. जांच के दौरान रेस्तरां एवं बार की ओर से विभाग द्वारा अनुमोदित ब्लू प्रिंट के साथ एक और नक्श दिखाया गया, जो विभाग से अनुमोदित नहीं था. यानी वह नक्शा फर्जी था.

विभाग की कमजोर निगरानी का फायदा उठाते हैं संचालक

उत्पाद विभाग के पास मैन पावर की कमी है, ऐसे में निर्धारित मापदंड के अनुरूप बार, लाउंज और रेस्तरां की निगरानी भी नहीं हो पाती है. वहीं, नियमों का पालन करने में खर्च आता है. इससे बचने के लिए संचालक विभाग की कमजोर निगरानी का फायदा उठाते हुए नियमों का उल्लंघन करते हैं. रेस्तरां एवं बार कैंपस में लगाये गये सीसीटीवी का फुटेज सहायक उत्पाद आयुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य है. संचालक को निर्देश दिया गया था कि प्रत्येक शनिवार और रविवार का फुटेज निश्चित रूप से उपलब्ध कराया जाये. यह जांच का विषय है कि सभी संचालक फुटेज उपलब्ध कराते हैं या नहीं. अगर कराया जाता है, तो विभागीय पदाधिकारी इसकी जांच करते है या भी नहीं.

20% के पास नहीं है ब्लू प्रिंट

पिछले वर्ष राजधानी के एक रेस्तरा एवं बार में हुए गोलीकांड के बाद सभी रेस्तरां एवं बार की जांच की गयी थी. इनमें 55 में से लगभग 11 रेस्तरां संचालक निर्धारित ब्लू प्रिंट उपलब्ध नहीं करा पाये थे. ऐसे में देखा जाये, तो लगभग 20 फीसदी रेस्तरां एवं बार के पास जांच के दौरान नक्शा नहीं था, जबकि इसे संबंधित परिसर में रखना अनिवार्य है.

ऐसे तोड़े जा रहे नियम

समय सीमा : तय समय सीमा के बाद भी बार, लाउंज और रेस्तरां में खुले रखे जा रहे हैं और शराब परोसी जा रही है.
सुरक्षा मानक : आग से बचाव के उपकरण, निकासी मार्ग समेत अन्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे हादसे होते हैं.
अवैध गतिविधियां : पिछले दिनों अरगोड़ा के एक बीयर बार में किन्नर के नृत्य करने व हंगामा का मामला सामने आया था. यहां हुक्का बार भी चज रहा था.
अवैध संगीत : कई बार, लाउंज और रेस्तरां में बिना लाइसेंस के डीजे या म्यूजिक सिस्टम नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है.
स्वच्छता : रसोई और बार क्षेत्र में स्वच्छता मानकों का पालन नहीं किया जाता है, जिससे ग्राहकों की सेहत पर भी असर पड़ता है.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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