आदिवासी एकता महाजुटान के मंच से बंधु तिर्की का हुंकार, बोले- यह सीटों की नहीं, संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई

रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में परिसीमन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर जोरदार आवाज उठी. पूर्व विधायक बंधु तिर्की और कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए.


रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

Ranchi Adiwasi Mahajutan: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान में परिसीमन, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठा. पूर्व विधायक बंधु तिर्की और झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया.

झारखंडी ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश

पूर्व विधायक बंधु तिर्की ने कहा कि यह लड़ाई केवल लोकसभा और विधानसभा सीटों को बचाने की नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की पहचान और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.

झारखंड को 'नागपुर' बनाने का प्रयास

उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें झारखंड को "नागपुर" बनाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन यह भगवान बिरसा मुंडा और वीर बुधु भगत की धरती है. उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर गांव-गांव में लोगों को लड़ाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश हो रही है. सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार से सावधान रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में विभिन्न जाति और समुदाय के लोग वर्षों से सहिया, कर्म और सामाजिक रिश्तों के साथ मिलकर रहते आए हैं.

जनसंख्या के आधार पर अधिकार घटाने की कोशिश

परिसीमन के मुद्दे पर बंधु तिर्की ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर झारखंड में आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी घटाने की कोशिश की गई, तो इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची के तहत मिले अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने पेसा कानून, मनरेगा और आदिवासी हितों से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को संगठित रहना होगा.

मंच से सुनाया गया राहुल गांधी का संदेश

झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा आदिवासियों को "वनवासी" कहती है, जबकि राहुल गांधी हमेशा उन्हें मूलवासी और आदिवासी मानते हुए जल, जंगल और जमीन पर उनका अधिकार स्वीकार करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में लगातार साथ रहे हैं और ओडिशा में आदिवासियों के धार्मिक स्थल की रक्षा के आंदोलन में भी शामिल हुए थे. के. राजू ने बताया कि रैली से पहले उनकी राहुल गांधी से बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंता का संदेश भेजा.

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आदिवासी सीटें घटाना चाहती है भाजपा

के. राजू ने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के जरिए आदिवासी सीटें कम करना चाहती है, ताकि बाद में उनके खिलाफ कानून लाए जा सकें. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार द्वारा आदिवासी हितों के लिए बनाए गए कई कानूनों को भाजपा ने संशोधनों के जरिए कमजोर किया है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक एकजुटता और जनसंघर्ष की जरूरत है.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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