रांचीः कैथोलिक महाधर्मप्रांत, रांची के नए सहायक बिशप के रूप में आनंद डेविड को अभिषेक किया गया. लोयोला मैदान में शनिवार की सुबह हुए इस विशेष अनुष्ठान की धर्मविधि आर्चबिशप विंसेंट आईंद ने संपन्न कराई. इस अवसर पर रोम (इटली) से पोप के द्वारा भेजे गए पत्र को पढ़कर सुनाया गया. रोम से आए पोप के प्रतिनिधि आंद्रे ने लैटिन में और फादर थियोडोर ने हिंदी में उस पत्र को पढ़कर सुनाया. इसके बाद धर्मविधि आगे बढ़ी. आर्चबिशप सहित अन्य बिशपों ने मोन्सेनयोर आनंद डेविड के सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीष दी.
इसके बाद उन्हें येसु ख्रीस्त और कलीसिया की सेवा की शपथ दिलाई गई. नए सहायक बिशप को अंगूठी, किरीट (मुकुट) और अधिकार दंड प्रदान किया गया. ये सभी वस्तुएं रोम से पोप के द्वारा भेजी गई थी. धर्मविधि के अगले चरण में आर्चबिशप के साथ नए सहायक बिशप ने मिस्सा बलिदान में हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की, सोसाइटी ऑफ जीसस के फादर अजीत खेस सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
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धर्माध्यक्ष को सेवक बनना चाहिए: आर्चबिशप विंसेंट आईंद
इस अवसर पर अपने संबोधन में आर्चबिशप विंसेंट आईंद ने कहा कि धर्माध्यक्ष (बिशप) किसी प्रतिष्ठा का नहीं, सेवा और कर्तव्य का सूचक है. प्रभु कहते हैं जो सबसे बड़ा है वह सबसे छोटा बने. धर्माध्यक्ष को सेवक बनना चाहिए. उन्होंने पूर्व पोप फ्रांसिस को उद्धृत करते हुए कहा कि संत पिता ने शक्ति को नहीं बल्कि सेवा को ज्यादा महत्व दिया था. प्रेम का बंधन कलीसिया को संगठित रखता है. आर्चबिशप ने बिशप अभिषेक का अभिप्राय समझाते हुए कहा कि जैसे पिता ने येसु ख्रीस्त को मानव जाति का उद्धार के लिए भेजा. उसी प्रकार येसु ने अपने चेलों (शिष्यों) को सभी मानव जाति के लिए भेजा. उसी तरह पीढ़ी दर पीढ़ी इस अटूट सिलसिला में धर्माध्यक्ष अभिषिक्त होते आए हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरन ने दी शुभकामाएं
शनिवार को डॉ कामिल बुल्के पथ (पुरुलिया रोड) स्थित आर्चबिशप हाउस में रांची महाधर्मप्रांत के नवनियुक्त सहायक बिशप आनंद डेविड खलखो के अभिषेक और प्रतिष्ठापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आनंद डेविड खलखो को नई जिम्मेदारी ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं. इस दौरान मौके पर आर्चबिशप विसेंट आइंद, फादर अजित कुमार खेस सहित अन्य धर्मगुरु उपस्थित थे.
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