Amit Shah, रांची : दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ का आयोजन धूमधाम से हुआ. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत देश के कई दिग्गज नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने जनजातीय महाकुंभ को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया. उन्होंने देश भर से आए जनजातीय समाज को आश्वस्त करते हुए साफ कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) से आदिवासियों पर किसी भी प्रकार की पाबंदी नहीं लगने वाली है. गृह मंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दुष्प्रचार एक सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है. यूसीसी जनजातियों को उनकी संस्कृति और परंपराओं से वंचित कर देगा.
यूसीसी से डरने की जरूरत नहीं: अमित शाह
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि मैं नरेंद्र मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री होने के नाते स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यूसीसी का कोई भी प्रावधान वनवासी जगत या व्यक्ति पर लागू नहीं होगा और न ही उनके अधिकारों का कोई अतिक्रमण होगा.” उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भाजपा शासित दो राज्यों- गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी को लागू किया जा चुका है, जहां विशेष प्रावधान करके पूरी जनजातीय आबादी को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है. उन्होंने समागम में शामिल लोगों से अपील की कि वे दिल्ली से यह संदेश लेकर जाएं और अपने समाज को जागरूक करें कि यूसीसी से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है.
लोभ-लालच या जबरन धर्म परिवर्तन बर्दाश्त नहीं: अमित शाह
संविधान निर्माताओं का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सभी को अपने मूल धर्म में सम्मान से जीने का अधिकार है. लोभ, लालच या जबरन कोई किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता. उन्होंने वनवासियों को अपनी संस्कृति की रक्षा का संकल्प दिलाते हुए कहा कि वनवासी समाज प्रकृति की पूजा करता है और यही प्रकृति पूजा हमें सीधे सनातन धर्म से जोड़ती है. उन्होंने समाज में भेद पैदा करने वालों को कड़ा संदेश देते हुए याद दिलाया कि हजारों साल पहले भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर और निषादराज के पैर धोकर यह साबित कर दिया था कि हम सब एक हैं.
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बिरसा मुंडा के ‘ऊलगुलान’ के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन
जनजातीय समागम को ऐतिहासिक बताते हुए अमित शाह ने कहा कि यह आयोजन आने वाले कई वर्षों तक याद किया जाएगा. यह जनजातियों को एकजुट करने और उनकी अनूठी संस्कृति को सुरक्षित रखने का एक बड़ा आंदोलन है, जो भगवान बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक ‘ऊलगुलान’ आंदोलन के बाद का सबसे बड़ा जनजातीय जमावड़ा है. संयोग से यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का वर्ष भी है.
पीएम मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया
देश की आंतरिक सुरक्षा पर बात करते हुए गृह मंत्री ने गर्व से घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और नीतियों के कारण देश से नक्सल समस्या का पूर्ण रूप से समाधान हो गया है. आज देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त है. जो तत्व वनवासी समाज का हक रोककर बैठे थे, उन्हें खत्म कर दिया गया है और अब पहाड़ों व जंगलों में विकास का नया दौर शुरू हो रहा है.
अटल ने बनाया मंत्रालय: केंद्रीय मंत्री अमित शाह
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस और भाजपा सरकारों के कार्यों की तुलना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश में पहली बार अलग से ‘जनजाति कल्याण मंत्रालय’ का गठन किया था. कांग्रेस के शासनकाल में आदिवासियों का कुल बजट महज 28 हजार करोड़ रुपये था, जिसे पीएम मोदी ने बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार करोड़ रुपये कर दिया है. उन्होंने गर्व जताते हुए कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर संताल परिवार की बेटी द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति के रूप में आसीन हैं, वहीं ओडिशा और छत्तीसगढ़ में जनजातीय मुख्यमंत्री राज्य की कमान संभाल रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने हालिया बंगाल चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की सभी 16 जनजाति बहुल सीटों पर भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. ज्ञात हो आदिवासी समागम में झारखंड के करीब 4500 ट्राइबल्स ने हिस्सा लिया. दिल्ली में आयोजित इस समारोह की खास बात ये रही कि इसमें झारखंड के तमाम स्वतंत्रता सेनानियों और दिग्गज आदिवासी नेता कार्तिक उरांव की भी तस्वीर लगी थी.
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