Ranchi News : स्कूलों में शुरू हुआ ''फ्रूट ब्रेक''

राजधानी के प्रमुख स्कूलों में ‘फ्रूट ब्रेक’ की नयी पहल शुरू की गयी है. इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को जंक फूड से दूर रखना और उन्हें फल खाने की अच्छी आदत विकसित करना है.

:::::: स्कूलों में शुरू हुआ ”फ्रूट ब्रेक”

:::: बच्चों को जंक फूड से दूर रखने का अभियान

::::: सुरेंद्रनाथ, जेवीएम श्यामली, सेंट जेवियर्स समेत कई स्कूलों में बच्चों को रोजाना फल खाने का समय

:::: स्वास्थ्य, एकाग्रता और पोषण सुधारने की दिशा में सराहनीय कदम

:::::: बच्चों में जंक फूड से दूरी और फल खाने की आदत डालना उद्देश्य

रांची. राजधानी के प्रमुख स्कूलों में ‘फ्रूट ब्रेक’ की नयी पहल शुरू की गयी है. इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को जंक फूड से दूर रखना और उन्हें फल खाने की अच्छी आदत विकसित करना है. यह पहल रांची के कई स्कूलों में देखने को मिल रही है. यदि राजधानी के सभी स्कूलों में इस नियम को लागू किया जाए तो बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ सही पोषण भी मिलेगा.

रांची के कुछ स्कूलों में शुरू हुई पहल

राजधानी के कई स्कूलों में फ्रूट ब्रेक की पहल चल रही है. इसमें सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल, गुरु गोविंद सिंह पब्लिक स्कूल, शारदा ग्लोबल स्कूल, गुरुनानक स्कूल, जेवीएम श्यामली, नन्हे कदम समेत अन्य स्कूल शामिल हैं. यहां कक्षा पांचवीं तक के बच्चों को फल खाने के लिए विशेष समय दिया जाता है.

रेंबो कलर फ्रूट का महत्व

बच्चों के लिए ‘रेंबो कलर फ्रूट’ यानी रंग-बिरंगे फल खाना अत्यंत लाभदायक है. इसमें लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला और बैंगनी जैसे रंगों के फल शामिल करने की सलाह दी जाती है. सेब, संतरा, केला, पालक, ब्लूबेरी, किवी, ब्लैकबेरी, स्ट्रॉबेरी, चेरी, आम, खीरा, अंगूर आदि फल पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं.

क्या है फ्रूट ब्रेक

फ्रूट ब्रेक स्कूल की समय-सारिणी में शामिल एक पांच से दस मिनट का विशेष अवकाश है. इसमें बच्चों को घर से लाए फल खाने के लिए समय दिया जाता है. इस पहल का उद्देश्य बच्चों में पोषण की पूर्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, एकाग्रता में सुधार लाना और स्वस्थ भोजन की आदत विकसित करना है. इस दौरान बच्चे एक-दूसरे को फल खाते देख प्रेरित होते हैं और धीरे-धीरे फल खाने की आदत विकसित कर लेते हैं.

जंक फूड के नुकसान

अक्सर बच्चे हेल्दी भोजन पसंद नहीं करते और जंक फूड, कैंडी, चॉकलेट जैसी बाहरी चीजें खाना पसंद करते हैं. इनका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है. जंक फूड में कैलोरी, वसा, चीनी और नमक की मात्रा अधिक होती है, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो सकती है. इसके सेवन से मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. जंक फूड बच्चों की पाचन शक्ति को भी कमजोर कर देता है, जिससे पेट दर्द, दस्त और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

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चिकित्सक की राय

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ शैलेश चंद्रा का कहना है कि जंक फूड सेहत के लिए नुकसानदेह है. इससे बच्चों में मोटापा, इम्यूनिटी की कमजोरी और आयरन की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. रंग-बिरंगे फल खाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है. पढ़ाई में ध्यान लगता है और वे कम बीमार पड़ते हैं. कुछ स्कूलों द्वारा चलायी जा रही यह पहल सराहनीय है.

क्या कहते हैं अभिभावक

जंक फूड बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. बच्चे अक्सर मैगी या पास्ता लेकर जाना पसंद करते हैं, जो उनके लिए सही नहीं है. यदि वे फल लेकर जायेंगे तो उन्हें पर्याप्त विटामिन और मिनरल्स मिलेंगे और वे स्वस्थ रहेंगे.

अनुभा, बरियातू

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स्कूल में फ्रूट ब्रेक होना बेहद जरूरी है. इससे बच्चे हेल्दी रहेंगे और जंक फूड से दूरी बनेगी. खेल-खेल में बच्चे फल खायेंगे और उनका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. घर पर बच्चे अक्सर फल खाने से मना करते हैं, इसलिए यह पहल बहुत अच्छी है. राजधानी के सभी स्कूलों में फ्रूट ब्रेक लागू होना चाहिए.

प्रिया प्रभाकर, अशोक नगर

प्राचार्यों की राय

बच्चों को जंक फूड अधिक पसंद होता है. उन्हें इससे दूर रखने और फल खाने की आदत डालने के लिए स्कूल में फ्रूट ब्रेक चलाया जा रहा है. इसमें बच्चे शिक्षक की उपस्थिति में घर से लाये फल खाते हैं. यह ब्रेक प्रतिदिन कक्षा पांचवीं तक के बच्चों के लिए रखा गया है. फल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है, इसलिए बच्चों को रोज फल खाना चाहिए.

समरजीत जाना, प्राचार्य, जेवीएम श्यामली

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शिक्षक की उपस्थिति में बच्चे फल खाते हैं, जिससे उनमें फल खाने की आदत विकसित होती है और फास्ट फूड से दूरी बढ़ती है. समय-समय पर अभिभावकों को भी जागरूक किया जाता है कि वे बच्चों के लंच बॉक्स में फल अवश्य रखें.

फादर फूलदेव सोरेन, प्राचार्य, सेंट जेवियर्स स्कूल, डोरंडा

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Author: PUJA KUMARI

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