जमशेदपुर के देवघर में दस साल से लागू है शराबबंदी

जमशेदपुर: ‘अबुआ दिशोम, अबुआ राज’. यह सामान्य सी बात पूरे झारखंड के गांवों में सुनने को मिलती है, लेकिन इसे कुछ ही गांवों ने चरितार्थ किया है. जमशेदपुर शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित है जमशेदपुर प्रखंड का देवघर गांव. गांव की आबादी करीब 450 है. 200 मकानों में यह आबादी रहती है. इस […]

जमशेदपुर: ‘अबुआ दिशोम, अबुआ राज’. यह सामान्य सी बात पूरे झारखंड के गांवों में सुनने को मिलती है, लेकिन इसे कुछ ही गांवों ने चरितार्थ किया है. जमशेदपुर शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित है जमशेदपुर प्रखंड का देवघर गांव. गांव की आबादी करीब 450 है. 200 मकानों में यह आबादी रहती है. इस गांव की पंचायत में ग्राम सभा ने 10 साल पहले गांव में शराबबंदी लागू करने का फैसला किया और इस पर कड़ाई से अमल भी हुआ.

जो युवक बेरोजगार थे, अब नौकरी कर रहे हैं. पहले शराब पीकर आते थे और पति-पत्नी के बीच मारपीट जम कर मारपीट होती थी. माता-पिता से भी युवा भिड़ जाते थे. बच्चों का बेवजह पिटना तो आम बात थी. लोग शराब पर पैसे बरबाद करके घर में कलह मोल लेते थे.

इस समस्या को देखते हुए वर्ष 2006 में प्रबुद्ध लोगों ने ग्रामसभा बुलायी. गर्मागर्म बहस हुई और अंत में तय हुआ कि गांव में न तो कोई शराब पियेगा और न ही कोई शराब की बिक्री करेगा. इस पर अमल करने के लिए गांव में ही सख्त कानून बनाया गया. तय हुआ कि अगर कोई पुरुष या महिला शराब पीते पकड़ी जाती है या गांव में किसी तरह का बवाल होता है, तो उन पर दो हजार रुपये या ग्रामसभा जो तय करेगा, उतनी रकम देनी पड़ेगी.
इस संबंध में क्षेत्र के प्रमुख सिमल मुर्मू ने बताया कि शुरुआत में थोड़ी समस्या तो थी, लेकिन इस समस्या को अब दूर कर लिया गया है. सारी परेशानियों का हल ढूंढ़ा जा चुका है. अब यदि कोई शराब पीकर गांव में आ जाता है या पकड़ा जाता है, तो गांव के ही लोग उसे पकड़ते हैं और पूरी पंचायत बैठ कर उसके लिए सजा तय करती है. आर्थिक दंड के साथ-साथ शारीरिक श्रम करने की सजा भी ऐसे लोगों को दी जाती है. शराब का सेवन करनेवाले शख्स को कुछ दिनों के लिए गांव से बाहर करने की सजा का भी प्रावधान है. वर्ष 2006 से ही गांव के लोग अपने बनाये कानून का अनुपालन कर रहे हैं.
शराबबंदी से गांव में शांति
गांव में हमलोगों को शांति मिली है. गांव में वैसे तो कोई शराब नहीं पीता है, लेकिन अगर बोतल भी दिख जाता है, तो उसका पता लगाया जाता है कि यह बोतल कहां से आया और कौन लाया. यह अनूठा प्रयास काफी कारगर है.
शांति सोरेन, ग्रामीण
सुधर गया है गांव : प्रज्ञा
हमारा गांव बहुत सुधरा है. पहले लोग शराब पीकर आते थे. मारपीट करते थे. हंगामा होता था. अब ऐसा नहीं होता. सभी लोगों का परिवार सुखी है. लोग सुकून से जीते हैं. सारे लोग काम करते हैं. शांति से रहते हैं.
प्रज्ञा मुर्मू , ग्रामीण
रोजगार के प्रति सभी जागरूक
हमारे गांव में लोगों में रोजगार के प्रति काफी जागरूकता आयी है. सारे लोग रोजगार से जुड़े हैं. पहले हमारे गांव में शराब बिकती थी. लोग शराब पीकर हो-हल्ला करते थे. अब ऐसा नहीं होता.
लंबू सोरेन , ग्रामीण

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