दो वर्षीय बीएड डिग्री मामले में हाइकोर्ट का निर्देश, सहायक आचार्य की 70 सीटें खाली रखें

झारखंड हाईकोर्ट ने प्रारंभिक विद्यालय सहायक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में दो वर्षीय B.Ed डिग्री धारकों को शामिल करने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. कोर्ट ने 70 सीटें रिक्त रखने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी.


Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में दो वर्षीय बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थियों को शामिल करने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की अपील याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. साथ ही राज्य सरकार और जेएसएससी को सहायक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा की 70 सीटें रिक्त रखने का निर्देश दिया है. खंडपीठ ने इस मामले में दायर अवमानना याचिका की आगे की सुनवाई पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी. वहीं, इसी मामले से जुड़े अन्य 168 अभ्यर्थियों को उचित राहत के लिए एकल पीठ के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी गयी है.

एकल पीठ के आदेश को जेएसएससी ने दी थी चुनौती

दरअसल, विप्लव दत्ता व अन्य के मामले में हाइकोर्ट की एकल पीठ ने दो वर्षीय बीएड डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को भी सहायक आचार्य की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया था. जेएसएससी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील दायर की थी. इसी अपील पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने फिलहाल 70 सीटें खाली रखने का निर्देश दिया है. जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि सहायक आचार्य नियुक्ति से संबंधित नियमों को लेकर पहले भी न्यायिक विवाद हो चुका है. उन्होंने बताया कि हाइकोर्ट ने झारखंड के रहने वाले वैसे विद्यार्थियों को भी सहायक आचार्य परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया था, जिन्होंने सीटेट या पड़ोसी राज्यों से टेट परीक्षा पास की थी. इस आदेश को परिमल कुमार व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

2024 में नियमावली में हुआ था संशोधन

सुनवाई के दौरान जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि इसी प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार ने वर्ष 2024 में सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली में संशोधन किया था. संशोधित नियमावली 29 जनवरी 2024 से लागू हुई थी. इसमें दो वर्षीय बीएड डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति प्रक्रिया में योग्य माना गया था. इसके बाद अभ्यर्थियों से आवेदन भी लिये गये. हालांकि, वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित परीक्षा के लिए सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली-2022 ही लागू रहेगी. जेएसएससी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संशोधित नियमावली, जो 29 जनवरी 2024 से लागू हुई थी, इस परीक्षा पर लागू नहीं होगी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला

जेएसएससी की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने दो वर्षीय बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने को लेकर कोई विशेष निर्देश नहीं दिया था. इसके बाद आयोग ने वर्ष 2022 की नियुक्ति नियमावली के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ायी. इस नियमावली के तहत अभ्यर्थियों से एक वर्षीय बीएड डिग्री की योग्यता मांगी गयी थी. आयोग का तर्क है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित परीक्षा के लिए वर्ष 2022 की नियमावली लागू रखने की बात कही है, तो बाद में संशोधित नियमावली के आधार पर दो वर्षीय बीएड अभ्यर्थियों को पात्र मानना उचित नहीं होगा. यही विवाद अब हाइकोर्ट की खंडपीठ के सामने है. सरकारी भर्ती नियमों में तारीखों का खेल भी कमाल का है, एक साल इधर-उधर और हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य बीच में लटक जाता है.

अभ्यर्थियों की ओर से क्या कहा गया

प्रतिवादी अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास दो वर्षीय बीएड की डिग्री है और उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किये जाने से वे सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. उनका पक्ष है कि संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए. मामले में एकल पीठ के आदेश के बाद दो वर्षीय बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का रास्ता खुला था. जेएसएससी ने इसी आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी है. अब खंडपीठ ने अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए 70 सीटें रिक्त रखने का निर्देश दिया है, ताकि अंतिम निर्णय आने तक इन सीटों पर स्थिति सुरक्षित रहे.

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168 अन्य अभ्यर्थियों को भी राहत का रास्ता

खंडपीठ ने इसी मामले से जुड़े अन्य 168 अभ्यर्थियों को भी उचित राहत के लिए एकल पीठ के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी है. इससे उन अभ्यर्थियों के लिए भी न्यायिक रास्ता खुला रहेगा, जो दो वर्षीय बीएड डिग्री के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का दावा कर रहे हैं. फिलहाल हाइकोर्ट के निर्देश के बाद 70 सीटों पर नियुक्ति का रास्ता रोक दिया गया है. अवमानना याचिका की सुनवाई भी अगले आदेश तक स्थगित रहेगी. अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी. तब तक दो वर्षीय बीएड अभ्यर्थियों की पात्रता और सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्थिति पर अदालत के अगले आदेश का इंतजार रहेगा.

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लेखक के बारे में

By राणा प्रताप सिंह

राणा प्रताप सिंह पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता जगत से जुड़े हैं. प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल में भी दस वर्ष का अनुभव है. जन सरोकार से जुड़ी खबरों में विशेष रूचि है.

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