रांची : राजधानी में 10 हजार से अधिक लॉज व हॉस्टल हैं. इसमें से केवल 81 ने नगर निगम से लाइसेंस लिया है. इसको लेकर नगर निगम ने जांच अभियान शुरू किया है.
नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम गली-मोहल्ले में बिना लाइसेंस के संचालित लॉज व हॉस्टल संचालकों को नोटिस थमा रही है. इधर, नोटिस के विरोध में गुरुवार को डेढ़ दर्जन से अधिक लॉज व हॉस्टल के संचालकों ने निगम में हंंगामा किया.
इनका कहना था कि वे वर्षों से लॉज का संचालन कर रहे हैं. निगम से पूर्व में लाइसेंस भी जारी किया गया है, लेकिन इस बार लाइसेंस का रिन्युअल नहीं किया जा रहा है.
वहीं दूसरी ओर निगम की इंफोर्समेंट टीम जुर्माना वसूलने के लिए पहुंच जा रही है, जो गलत है. लॉज संचालकों ने कहा कि अगर वे गलत तरीके से लॉज का संचालन करते, तो निगम फाइन वसूलता. इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है. हमारा आवेदन निगम में पेंडिंग है और निगम के कर्मचारी प्रतिदिन आकर हमें फाइन करने की चेतावनी दे रहे हैं. इससे हम लोगों को परेशानी हो रही है. इसलिए इस पर रोक लगायी जाये.
इन निर्देशों का भी करना होगा पालन : लॉज व हाॅस्टल संचालन के लिए सबसे पहले उसमें गार्ड का रहना आवश्यक है. सुरक्षा के दृष्टिकोण से उसमें फायर फाइटिंग, सीसीटीवी सहित छात्रों के अनुपात में पर्याप्त शौचालय का रहना जरूरी है. उपरोक्त नियमों का पालन करने वाले भवनों को ही नगर निगम लाइसेंस जारी करता है.
नक्शा के कारण अधिकतर लॉज व हॉस्टल को नहीं जारी किया जा रहा है लाइसेंस : नगर निगम में वर्तमान में 300 लॉज व हॉस्टल के आवेदन पेंडिंग हैं. इस संबंध में बाजार शाखा के कर्मचारियों का कहना है कि लॉज व हॉस्टल चलाने के लिए निगम की ओर से कुछ शर्तें रखी गयी हैं.
इसमें प्रमुख शर्त भवन का नक्शा है. जिस भवन का नक्शा पास होगा, उसे लॉज चलाने की अनुमति दे दी जायेगी. जो आवेदन निगम में जमा हुए हैं. उन आवेदनों की जांच की जा रही है. जांच में सब कुछ ठीक पाये जाने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जायेगा.
