रांची : कोर्ट में गवाहों के नहीं आने से आरोपी छूट रहे हैं. कई गंभीर मामले ऐसे हैं जिनमें गवाह नहीं पहुंचे अौर इसका लाभ आरोपी को मिला. गवाही के लिए नहीं आनेवालों में पुलिस पदाधिकारी भी शामिल हैं. इसकी वजह से नक्सल से लेकर, गंभीर मामलों में फंसे बड़े आरोपी बरी हो जा रहे हैं.
हालांकि अदालत इन मामलों में बेहद संजीदा है अौर कई बार निर्देश जारी किये गये हैं कि पुलिस अौर संबंधित लोग गवाहों को अदालत में भेजना सुनिश्चित करें. कई बार काेर्ट नहीं आनेवाले गवाहों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किये गये है. इसके बाद भी गवाहों का कोर्ट नहीं पहुंचना चिंता का सबब है.
केस एक : 26 जुलाई को अदालत ने सैयद शोएब साह नामक आरोपी को मारपीट, जान से मारने की धमकी देने अौर पैसे छीनने के मामले में बरी कर दिया. आरोपी आठ सितंबर 2017 को गिरफ्तार हुआ था, उसी समय से जेल में था.
इस वाद में सुखदेवनगर थाना के तत्कालीन एसआइ अौर अनुसंधानकर्ता शंकर प्रसाद सहित किसी भी गवाह की गवाही नहीं हुई. जबकि गवाहों के खिलाफ समन, वारंट अौर गैर जमानतीय वारंट भी जारी हुआ था.
केस दो : नौ मई को भाकपा माअोवादी संगठन से जुड़े निखिल चंद्र महतो को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. आरोप था कि वह नक्सलियों को विस्फोटक पदार्थ पहुंचाता था. मामले में गवाह रहे चार में से तीन पुलिसकर्मी गवाही देने कोर्ट नहीं पहुंचे.
केस तीन : 29 मार्च को अवैध हथियार रखने के चार आरोपी सूरज उरांव, राज रूपेंदर सिंह उर्फ मोनू सिंह, रितेश वर्मा अौर सुरेंद्र उरांव कोर्ट से बरी हो गये. पंडरा अोपी कांड संख्या 309/16 से जुड़े इस मामले में पुलिस की जिस टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार किया उनमें से एक भी अदालत में गवाही देने नहीं पहुंचा. अदालत ने गवाहों को कई बार समन जारी किया पर साल भर में सिर्फ एक पुलिसकर्मी ने ही गवाही दी.
केस चार : जेपीएससी नियुक्ति घोटाला मामला में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एलिस उषारानी सात मार्च को बरी हो गयीं. मामले में गवाह जांच पदाधिकारी भोला पासवान अौर कार्यपालक दंडाधिकारी संजीव लोचन अदालत नहीं पहुंचे. गवाह लाने के लिए डीजीपी तक को पत्र लिखा गया था. कोर्ट ने फैसले में लिखा था कि ऐसे गंभीर मामले में भी सरकार गवाहों को लाने में विफल रही.
केस पांच : मानव तस्करी मामले में 15 मार्च को जांच पदाधिकारी सत्यदेव शुक्ला सहित दो गवाहों के खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया. ये कोर्ट में गवाही देने नहीं आ रहे थे.
