रांची : मंत्री सरयू राय ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य में निर्माणाधीन परियोजनाओं में निम्न स्तर का काम हो रहा है. ये परियोजनायें झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड और झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड द्वारा अरबों रुपये की लागत से क्रियान्वित की जा रही हैं.
इन पर होने वाला खर्च भारत सरकार से मिला है. लेकिन इन परियोजनाओं में जिस तरह से काम हो रहा है, वह निम्न स्तर का है. मंत्री ने लिखा है कि कार्य की निम्न गुणवत्ता का प्रमाण उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं की जांच से पता चला है. पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि आरएपीडीआरपी योजना के तहत जो काम ऊर्जा विभाग करा रहा है, उनकी गुणवत्ता सही नहीं हुई या काम आधा अधूरा रहा, तो इसका खामियाजा आगे आनेवाले दिनों में भुगतना पड़ेगा.
कमीशन मांगे जाने पर क्या कार्रवाई हुई : आरएपीडीआरपी का क्रियान्वयन के संबंध में पत्र में लिखा है कि इसे दो भाग में पूरा होना था. पहले भाग में तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था, जिसमें बताना था कि योजनाएं कैसे विफल हुईं. इसके लिए कौन जिम्मेदार है.
दूसरे भाग के तहत परियोजना की संरचनाएं बनायी जा रही हैं. यह काम ठेकेदारों को टर्न की पर दिया गया है. इन्हीं कार्यों में से एक के लंबित भुगतान को दिये जाने के एवज में कमीशन मांगे जाने का जिक्र टाटा पावर की ओर से आपको (मुख्य सचिव को) ई-मेल भेजकर लगाया है. इसकी जांच व कार्रवाई क्या हुई, उसका पता नहीं चला है.
घटिया निर्माण की बानगी : मंत्री ने लिखा है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में पावर सब स्टेशन निर्माण, भूमिगत केबलिंग व ओवरहेड केबलिंग का कार्य वोल्टास कंपनी कर रही है. काम घटिया होने की मेरी शिकायत की जांच जमशेदपुर क्षेत्र के अधिकारियों ने की. शिकायत सही भी है. मैंने ऊर्जा विभाग की वितरण कंपनियों से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगा है. टर्न की बेसिस पर हो रहे काम सही तरीके से नहीं हुआ, तो यह योजना भी पूर्व की एपीडीआरपी की तरह विफल होगा.
