जेपीएससी-2 : पीटी में फेल, फिर भी 50 से अधिक बन गये अफसर

शकील अख्तर विधि विज्ञान निदेशालय का आंकड़ा, सीबीआइ कर रही जांच रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित द्वितीय परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में फेल होनेवाले लोग भी मुख्य परीक्षा में शामिल हुए और सफल हो कर अफसर बन गये हैं. विधि विज्ञान निदेशालय (डीएफएस) के आंकड़ों के अनुसार एेसे लोगों की […]

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शकील अख्तर
विधि विज्ञान निदेशालय का आंकड़ा, सीबीआइ कर रही जांच
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित द्वितीय परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में फेल होनेवाले लोग भी मुख्य परीक्षा में शामिल हुए और सफल हो कर अफसर बन गये हैं. विधि विज्ञान निदेशालय (डीएफएस) के आंकड़ों के अनुसार एेसे लोगों की संख्या 50 से अधिक है.
डीएफएस के इन आंकड़ों से जेपीएससी द्वारा आयोजित सिविल परीक्षा-2 में हुई गड़बड़ी का अंदाजा लगाया जा सकता है. फिलहाल हाइकोर्ट के आदेश पर सीबीआइ जेपीएससी नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही है.
जेपीएससी-2 में हुई गड़बड़ी के मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं और इंटरव्यू में दिये गये अंक पत्रों की जांच करायी गयी. इसमें विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं और इंटरव्यू में दिये गये नंबरों में किये गये काट-छांट की जांच की गयी.
इस जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि जेपीएससी-2 में 50 से अधिक एेसे लोगों को पीटी से लेकर मुख्य परीक्षा तक में पास कराया गया, ताकि उन्हें विभिन्न सेवाओं में नियुक्ति की अनुशंसा की जा सके. इसके लिए विभिन्न स्तर पर 02 से लेकर 251 नंबर तक बढ़ाये गये.
जांच एजेंसियों द्वारा तैयार आंकड़ों के अनुसार जितेंद्र कुमार यादव का रोल नंबर 1232537 था. उन्हें लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में कुल 841.33 नंबर मिले थे. विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा की गयी जांच में यह पाया गया कि उनकी उत्तरपुस्तिका और इंटरव्यू के दस्तावेज में काट-छाट कर 12 नंबर बढ़ाये गये थे.
यानी उन्हें वास्तव में 829.88 नंबर ही मिले थे, जबकि परीक्षा में सफल होने के लिए संबंधित आरक्षित वर्ग का कट ऑफ मार्क्स 833 था. पर वह पीटी में फेल थे. प्रतिभा कुजूर का रोल नंबर 1566321 था. उन्हें कुल 785.67 नंबर दिये गये थे. उनकी कॉपियों में काट-छाट कर कुल 23 नंबर बढ़ाये गये थे.
उन्हें वास्तव में कुल 762.67 नंबर ही मिले थे. संबंधित सेवा और आरक्षित वर्ग के लिए कट ऑफ मार्क्स 784 था. इस तरह उन्हें नंबर बढ़ा कर पास कराया गया था. वह भी पीटी में फेल थी. संतोष सिंह के मामले में भी हेराफेरी कर कुल 876 नंबर दिये गये थे. उन्हें पास कराने के लिए कुल 37 नंबर बढ़ाये गयेे थे, क्योंकि कट ऑफ मार्क्स 840.67 था. वह भी पीटी में फेल थे. श्वेता का रोल नंबर 1451873 था.
उनकी उत्तर पुस्तिकाओं और इंटरव्यू के पेपर में काट-छांट और ओवरराइटिंग कर 69.5 नंबर बढ़ा कर कुल 931 नंबर दिये गये थे. यानी वास्तव में उन्हें 861.5 नंबर ही मिले थे. परीक्षा में अंतिम रूप से सफल होने के लिए कट ऑफ मार्क्स 872.67 था. विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार वह भी पीटी में फेल थीं.
251 नंबर बढ़ा कर परीक्षा में सफल कराया
कॉपियों में काट-छांट और ओवरराइटिंग कर सबसे ज्यादा नंबर बढ़ाये जाने का मामला शिशिर कुमार सिंह का पकड़ में आया है. उनका रोल नंबर 1566290 था. उन्हें वास्तव में कुल 623.33 नंबर ही मिले थे.अंतिम रूप से सफल होने के लिए कट ऑफ मार्क्स 840.67 था, इसलिए उत्तरपुस्तिका और इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेज में काट-छांट कर 251 नंबर बढ़ा कर परीक्षा में अंतिम रूप से सफल घोषित कराया गया. वह भी पीटी में फेल थे.
पीटी में फेल होने के बावजूद बने अफसर
नाम कुल नंबर बढ़ाया सही नंबर पीटी
जीतेंद्र कु यादव 841.33 12 829.33 फेल
प्रतिभा कुजूर 785.67 23 762.67 फेल
लिली एल लकड़ा 793.33 39 754.33 फेल
संतोष सिंह 876 37 839 फेल
श्वेता 931 69.5 861.5 फेल
शिशिर कु सिंह 874.33 251 623.33 फेल
शिवाजी भगत 842 29 813 फेल
अनंत कु मिश्रा 846.67 13 833.67 फेल
सुनील कु सिंह 835.33 06 829.33 फेल
गुलाम समदानी 838.67 21 817.67 फेल
सुरेंद्र कु गोप 833.67 02 831.67 फेल
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