दो पोस्टल वोट की गिनती नहीं करने को लेकर हो रहा विवाद
रांची : रांची विश्वविद्यालय सीनेट चुनाव विवादों में घिर गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीनेट चुनाव के लिए डीएसडब्ल्यू की अध्यक्षता में कोर कमेटी गठित की थी. कोर कमेटी को चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गयी थी, पर कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया में ही बदलाव कर दिया.
रांची विवि सीनेट चुनाव के प्रावधान से अलग कोर कमेटी ने अपने स्तर से प्रावधान में बदलाव कर दिया. विवि के सीनेट चुनाव के नियम में पूर्व में पोस्टल वोट का प्रावधान नहीं था. इस वर्ष चुनाव को लेकर गठित कोर कमेटी ने अपने स्तर से इस संबंध में निर्णय ले लिया.
कमेटी के निर्णय के अनुरूप अगर विवि सीनेट चुनाव के वोटर विवि कार्य से बाहर जाते हैं, तो वे अपना पोस्टल वोट डाल सकते हैं, पर पोस्टल वोट की गिनती तब की जायेगी जब दो प्रत्याशी के बीच वोट बराबर हो.
कोर कमेटी ने यह निर्णय अपने स्तर से ले लिया. इसे न तो सिंडिकेट की और न ही सीनेट की स्वीकृति प्राप्त है. ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या कोर कमेटी चुनाव प्रक्रिया में अपने स्तर से बदलाव कर सकती है. कोर कमेटी के सदस्य भी इस पर कुछ कहने को तैयार नहीं हैं.
कुलपति से मिले डाॅ अाशीष झा : विवि सीनेट चुनाव के प्रत्याशी डॉ अाशीष झा ने बुधवार को कुलपति डॉ रमेश पांडेय से मुलाकात की. डाॅ आशीष झा ने उन्हें मामले में जल्द कानूनी सलाह लेकर कार्रवाई करने की मांग की.
कानूनी सलाह लेगा विवि
विश्वविद्यालय अब पूरे मामले में कानूनी सलाह लेने की तैयारी कर रहा है. विवि के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने भी कहा है कि सीनेट चुनाव में पोस्टल वोट लेने का प्रावधान नहीं है. अब कानूनी सलाह के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जायेगी.
क्या है पूरा मामला
रांची विवि के साइंस व वाणिज्य संकाय के सीनेट सदस्य चुनाव में डॉ आशीष कुमार झा एक वोट से चुनाव हार गये थे. विवि ने दो पोस्टल वोट की गिनती नहीं की. विवि का कहना है कि दोनों प्रत्याशी के वोट बराबर होने पर ही पोस्टल वोट की गिनती की जायेगी.
…तब तो भंग हो जायेगी पोस्टल वोट की गोपनीयता
कोर कमेटी ने पोस्टल वोट की गिनती दो प्रत्याशियों के मत बराबर होने पर करने की बात कही है. जानकार लोगों का कहना है कि कमेटी का निर्णय गलत है.
अगर चुनाव में दो प्रत्याशी को 20-20 वोट मिले हों और एक वोट पोस्टल हो, तो बाद में पोस्टल वोट खोलने से यह पता चल जायेगा कि उक्त वोटर ने अपना वोट किसे दिया. ऐसे में वोट की गोपनीयता भंग हो जायेगी. इस कारण पोस्टल वोट की गिनती बाद में नहीं, बल्कि पहले होनी चाहिए.
