रांची : माहवारी को लेकर समाज को साेच बदलने की जरूरत है : पटनायक

मेन्सुरल हाइजीन मैनेजमेंट पर कार्यशाला आयोजित 15 नवंबर को पूरा झारखंड होगा ओडीएफ घोषित निजी स्कूलों में भी सेनेटरी पैड देने पर विचार करे विभाग : एपी सिंह रांची : माहवारी एक सामान्य प्रक्रिया है, जो प्रत्येक माह महिलाओं का आता ही है. इस मामले में समाज को सोच बदलने की जरूरत है. महिलाओं को […]

मेन्सुरल हाइजीन मैनेजमेंट पर कार्यशाला आयोजित
15 नवंबर को पूरा झारखंड होगा ओडीएफ घोषित
निजी स्कूलों में भी सेनेटरी पैड देने पर विचार करे
विभाग : एपी सिंह
रांची : माहवारी एक सामान्य प्रक्रिया है, जो प्रत्येक माह महिलाओं का आता ही है. इस मामले में समाज को सोच बदलने की जरूरत है. महिलाओं को सोशल टैबू से निकलना होगा. लड़कों को भी इसकी जानकारी दी जानी चाहिए. यह बात पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने कही. वह होटल बीएनआर में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा यूनिसेफ के तत्वावधान में स्टेट लेवल काॅनसुलटेशन ऑन मेन्सुरल हाइजीन मैनेजमेंट पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं.
श्रीमती पटनायक ने कहा कि 15 नवंबर को पूरा राज्य खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया जायेगा. इसके बाद से ओडीएफ प्लस अभियान चलेगा. ओडीएफ प्लस में इस बार माहवारी स्वच्छता को भी जोड़ा जायेगा. उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन की तरह माहवारी स्वच्छता को भी अभियान का रूप देना होगा. इसके लिए लड़कियों को आगे आना होगा और इस विषय पर खुल कर बात करनी होगी.
उन्होंने कहा कि जिस तरह से ओडीएफ के लिए सारे विभागों ने सहयोग किया, इसी तरह से इस अभियान में भी स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा विभाग मिल कर काम करेंगे तो सफलता मिलेगी.उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह की दो तारीख को गांवों में और 19 तारीख को स्कूलों में स्वच्छता सभा में भी इस बात पर चर्चा होनी चाहिए. इससे समाज सोशल टैबू से बाहर निकलेगा. उन्होंने स्थानीय स्तर पर सेनेटरी नैपकीन के उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया ताकि आसानी से इसकी उपलब्धता हो सके.
बाल संसद में माहवारी स्वच्छता पर चर्चा हो : स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने कहा कि स्कूलों में हाइजीन और सेनिटेशन पर कई कदम उठाये गये हैं. उन्होंने कहा कि माहवारी पर जागरूकता कार्यक्रम निजी स्कूलों में भी चलाया जाना चाहिए. कहा कि जेंडर इक्वालिटी की बात करें तो स्कूली शिक्षा विभाग इस मामले में आगे है. क्योंकि छात्रों के अनुपात में यहां छात्राएं 50 प्रतिशत के करीब है.
श्री सिंह ने कहा कि स्वच्छता पर जब भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिलता है तो केवल सरकारी स्कूल ही चयनित हो पाते हैं. निजी स्कूलों का नाम भी नहीं होता. उन्होंने कहा कि झारखंड में बाल संसद यूनिक है. इसका इस्तेमाल भी माहवारी स्वच्छता पर चर्चा के लिए होना चाहिए. उन्होंने पेयजल विभाग से आग्रह किया कि स्कूलों में लड़कियों के जहां टॉयलेट हों, वहां सेनेटरी नैपकीन डिस्पोजल के एक डस्टबीन भी रखें.
एनएचएम के मिशन निदेशक ने कहा कि यह एक बॉयोलॉजिकल प्रक्रिया है. इसे टैबू नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा स्कूलों में नैपकीन वितरण का काम आरंभ किया गया था, पर कुछ तकनीकी कारणों से यह बेहतर तरीके से संचालित नहीं हो रहा है.
यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ मधुलिका जोनाथन ने कहा कि माहवारी पर नीति को मजबूत करने की जरूरत है. इसके लिए स्टेट लेवल एक्शन प्लान बनाया जा रहा है. जो सरकार की नीति बनाने में सहायक होगा.
इसके पूर्व एसबीएम के निदेशक अमित कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. धन्यवाद ज्ञापन यूनिसेफ की वाश अॉफिसर लक्ष्मी रंजन सक्सेना ने दिया. कार्यक्रम में ग्रुप डिस्कशन के दौरान एक्शन प्लान पर चर्चा की गयी.

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