रांची : देश के आदिवासियों को छठी अनुसूची के तहत लायें: मधुकर

रांची : अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शनिवार को बगईचा, नामकुम में शुरू हुुआ़ परिषद के 50 साल पूरे होने के पर आयोजित अधिवेशन में कार्यकारी अध्यक्ष मधुकर राव पिचड़ ने कहा कि आदिवासियों को बजट में उनकी आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए़ इसके लिए केंद्र व राज्य […]

रांची : अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शनिवार को बगईचा, नामकुम में शुरू हुुआ़ परिषद के 50 साल पूरे होने के पर आयोजित अधिवेशन में कार्यकारी अध्यक्ष मधुकर राव पिचड़ ने कहा कि आदिवासियों को बजट में उनकी आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए़
इसके लिए केंद्र व राज्य की सरकारें कानून बनाये़ देश में आदिवासी नौ प्रतिशत हैं, पर केंद्रीय बजट में उन्हें सिर्फ तीन प्रतिशत ही मिलता है़ कई राज्यों में इस राशि का भी विचलन होता है़
इसके साथ ही देश के सभी आदिवासियों को छठी अनुसूची के तहत लाया जाये़ वनाधिकार कानून, पेसा कानून आदि का सख्ती से अनुपालन हो़ राज्यसभा, विधान परिषद, न्यायालय व निजी क्षेत्रों में भी आदिवासियों को आरक्षण मिले़ स्व कार्तिक उरांव के सपनों को साकार करने के लिए देश के सभी आदिवासियों को एक साथ चलने की जरूरत है़
आदिवासी भी बने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री
बिहार विधानसभा के पूर्व सदस्य सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि राज्यपालों ने राज्य के आदिवासियों के संदर्भ में राष्ट्रपति को दी जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट और सभी राष्ट्रपति ने दस साल में आयोग बनाने की बात को नजरअंदाज किया है़ देश में कभी भी किसी आदिवासी को राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बनने का अवसर नहीं मिला है, जबकि अन्य सभी समाज के लोगों को मौका मिला है़ हम इसकी मांग करते है़ं
पूरे देश में एक हो एसटी सर्टिफिकेट का फॉर्मेट
पूर्व आइजी शीतल उरांव ने कहा कि एसटी सर्टिफिकेट का फॉर्मेट पूरे देश में एक हो़ जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सिर्फ ऑनलाइन तक सीमित नहीं रखा जाये़
उच्च शिक्षा के लिए केंद्र सरकार की शत प्रतिशत शिक्षा अनुदान की नीति पर झारखंड सरकार ने 50,000 रुपये की सीमा लगा दी है़ इसी तरह बीआइटी पॉलिटेक्निक की सालाना फीस 50,000 रुपये है, पर राज्य सरकार सिर्फ 15,000 रुपये की छात्रवृत्ति देती है़ इससे राज्य के आदिवासी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे है़ं ग्रेजुएशन के लिए महानगर जाने वाले इच्छुक आदिवासी विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए़
हर हाल में परिषद गैर राजनीतिक संगठन बनी रहे
पूर्व आइपीएस डॉ अरुण उरांव ने कहा कि परिषद की केंद्रीय शाखा सुनिश्चित करे कि शाखाओं में भी लगातार और समय पर चुनाव कराये जाये़ं नये नेतृत्वकर्ता तैयार किये जाये़ं यह सुनिश्चित किया जाये कि परिषद हर हाल में एक गैर राजनीतिक संगठन बनी रहे़ कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने की़
सम्मेलन के पहले दिन पूर्व आइएएस उपेंद्र नारायण उरांव, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष बिरसा तिर्की, मोहनलाल उरांव, रामदेव भगत, तमिलनाडु के मुरुगेसन राव, कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष डॉ केएम मैत्री, असम के सुभाष तिर्की, नीरेंद्र मिर्धा, तेलंगाना के कोमाराम लक्ष्मण राव, सिधरप्पा काले, बिहार के जीतेंद्र उरांव, नारायण उरांव, असम के दुर्गा हांसदा, डॉ बिरसा उरांव, डॉ अभय सागर मिंज व अन्य मौजूद थे़

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