बचायें पहाड़ी मंदिर : भोले बाबा के दरबार की दुर्दशा देख नाराज हो रहे भक्त, कहते हैं...पहलेवाला पहाड़ी मंदिर ही इससे बेहतर था

रांची : पहाड़ी मंदिर के प्रवेश द्वार से ही अव्यवस्था दिखाई देने लगती है. सीढ़ी पर मिट्टी का जमाव व फिसलन की वजह से भक्तों को तिलमिलाते हुए देखा जा सकता है. आगे बढ़ने पर मिट्टी के कटाव के कारण पेड़ गिरा हुआ दिखता है. गार्डवाॅल भी काम नहीं करता है, क्याेंकि उसमें दरार पड़ […]

रांची : पहाड़ी मंदिर के प्रवेश द्वार से ही अव्यवस्था दिखाई देने लगती है. सीढ़ी पर मिट्टी का जमाव व फिसलन की वजह से भक्तों को तिलमिलाते हुए देखा जा सकता है.
आगे बढ़ने पर मिट्टी के कटाव के कारण पेड़ गिरा हुआ दिखता है. गार्डवाॅल भी काम नहीं करता है, क्याेंकि उसमें दरार पड़ गयी है. शेड तो बना है, लेकिन वह टूट गया है, जिससे बरसात मेें पानी टपकता है. भक्त भीगते हुए मंदिर में जाने को विवश हैं.
पहाड़ी मंदिर परिसर में जगह-जगह भक्तों की सुविधा के लिए शौचालय बने हुुए हैं, लेकिन ज्यादातर शौचालयों में ताला लगा हुआ है. इस कारण महिला भक्ताें को सबसे ज्यादा परेशानी होती है. सीढ़ियां टूटी हाेने के कारण महिला, बुजुर्ग भक्तों को मंदिर तक पहुंचने में दिक्कत होती है. समिति द्वारा निर्माण कार्य किये जाने के कारण पूरा मंदिर अस्त-व्यस्त हो गया है. कहीं बीच सीढ़ी पर पिलर खड़ा है, तो कही पिलर की रॉड निकली हुई है.
शेड के नीचे लगे पंखे बेकार हो गये : शेड के नीचे भक्तों की सुविधा के लिए पंखा लगाया गया है, लेकिन पंखे की हालत देखने लायक है. कई जगहों से पंखे खोल लिये गये हैं, जबकि कई पंखों के डैने टेढ़े हो गये हैं. ऐसा लगता है किसी ने जानबूझ कर पंखों के डैने मोड़ दिये हों.
सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे : सुरक्षा के दृष्टिकोण से पहाड़ी मंदिर परिसर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं. साथ ही यह सूचना भी चस्पां है कि ‘आप सीसीटीवी कैमरे की जद में हैं’, लेकिन इसमें से अधिकांश सीसीटीवी कैमरे काम नहीं करते हैं. ऐसे में ये सीसीटीवी कैमरे शो पीस बन कर रह गये हैं.
मुख्य मंदिर के पास बना हॉल तोड़ दिया गया, अब जम गयी है घास
पहाड़ी पर मुख्य मंदिर के समीप हाॅल का निर्माण कराया गया था, लेकिन निर्माण कार्य के नाम पर
उसे तोड़ दिया गया है. वहां खुदाई कर छोड़ दिया गया है. बारिश के पानी के कारण ऊंची-ऊंची घास उग गयी है. यह हॉल खंडहर के रूप में तब्दील हो गया है. समिति के सक्रिय सदस्य व कर्मचारी बताते हैं कि उन्होंने हाॅल के निर्माण के लिए श्रमदान किया है. ईंट, बालू व सीमेंट लाये है. शहर में घूम-घूम कर पैसे जमा किये है. हाॅल का निर्माण होने पर इसमें शादी का कार्यक्रम होता था. सावन में यहां झांकी सजायी जाती थी.
पहाड़ी काे बचाने के लिए सिविल साेसाइटी व सरकार काे आगे आना हाेगा
हाल के दिनों में रांची पहाड़ी पर सौंदर्यीकरण के नाम पर जो भी काम हुए हैं, उससे पहाड़ी की सुंदरता तो नहीं बढ़ी, बल्कि यह खोखला ही हुआ है. ऐसे में अब हमें यह फैसला करना होगा कि आखिर हम क्या चाहते हैं. क्या हम सौंदर्यीकरण के नाम पर पहाड़ी के अस्तित्व को खत्म करेंगे? या जो वर्तमान में पहाड़ी बची हुई है, उसे ही बचायेंगे.
मेरे विचार से इसे अब बचाने के लिए सिविल सोसाइटी के साथ सरकार को भी आगे आना होगा. सबसे पहले तो हमें यह तय करना होगा कि अब हम किसी प्रकार का निर्माण कार्य पहाड़ी पर नहीं करेंगे. इसके अलावा हर साल जो भू-स्खलन की घटना सामने आती है, उसके लिए हमें पहाड़ी के चारों ओर घास व पेड़ लगाने होंगे, ताकि पहाड़ी की मिट्टी को दरकने से रोका जा सके. इसके अलावा पहाड़ी पर हमें एक प्रॉपर ड्रेनेज सिस्टम बनाना होगा.
ताकि ऊपर में जो भी पानी श्रद्धालु चढ़ाते हैं. वह पूरी पहाड़ी पर बहने के बजाय ड्रेनेज सिस्टम से नीचे आये. इससे भू-स्खलन पर काफी हद तक लगाम लगेगी. मेरा सरकार से आग्रह होगा कि एक बार पहाड़ी को बचाने के लिए बेहतर प्लान बनाये. साथ ही अगर जरूरत पड़े, तो पहाड़ी की चोटी पर लगाये गये फ्लैग पोल को वहां से हटाकर कहीं और लगाया जाये.

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