नियुक्ति-प्रोन्नति मामला : नामधारी-आलमगीर ने लगायी थी नियुक्तियों की झड़ी, भोक्ता ने बांटी थी प्रमोशन की रेवड़ी

लोकतंत्र के मंदिर में ही टूटा नियम-कानून रांची : राज्य गठन के बाद लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा में ही नियम-कानून टूटे़ नीति-नियम बनाने वाली संस्था ही कानून-कायदे के रास्ते पर नहीं चली. अवैध नियुक्तियां हुईं. राज्य के पहले स्पीकर इंदर सिंह नामधारी और अालमगीर अालम के कार्यकाल में 700 से ज्यादा लोगों की बहाली हुई़ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
लोकतंत्र के मंदिर में ही टूटा नियम-कानून
रांची : राज्य गठन के बाद लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा में ही नियम-कानून टूटे़ नीति-नियम बनाने वाली संस्था ही कानून-कायदे के रास्ते पर नहीं चली. अवैध नियुक्तियां हुईं. राज्य के पहले स्पीकर इंदर सिंह नामधारी और अालमगीर अालम के कार्यकाल में 700 से ज्यादा लोगों की बहाली हुई़ सांसद-विधायक, नेताओं और रसूखदार लोगों के रिश्तेदार व करीबियों को बहाल करने का अरोप लगा़ घपले-घोटाले को ढंकने-छुपाने का काम किया गया. विधानसभा में आलमगीर आलम के समय सहायक पद नेताओं के बीच बांटे गये. यही नहीं इन सहायकों को स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता के कार्यकाल में एसओ (प्रशाखा पदाधिकारी) भी बना दिया गया.
मामला सार्वजनिक हुआ, तो अवैध नियुक्ति-प्रोन्नति की जांच शुरू हुई़ तत्कालीन राज्यपाल सैयद अहमद के निर्देश के बाद जांच आयोग का गठन किया गया़ सेवानिवृत्त न्यायाधीश लोकनाथ प्रसाद का कार्यकाल खत्म हुआ, तो जांच आयोग का जिम्मा न्यायाधीश विक्रमादित्य को मिला़ विक्रमादित्य आयोग ने जांच पूरी की़ तीनों स्पीकर को दोषी पाया गया़
झारखंड विधानसभा में नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई. स्पीकर नामधारी ने 274 और आलमगीर आलम ने 324 नियुक्तियां कीं.
इन नियुक्तियों में नेताओं के करीबियों को उपकृत किया गया. एक खास इलाके से लोगों की बहाली की गयी. राज्यपाल द्वारा स्वीकृत पदों से ज्यादा लोगों को बहाल किया गया़ आरोप यह भी लगा कि एक दिन में ही 200 से 600 लोगों का साक्षात्कार लिया गया, जबकि एक ही साक्षात्कार बोर्ड गठित की गयी थी.
यही नहीं साक्षात्कार बोर्ड में शामिल लोग व्यस्त रहे, तो उनकी जगह टाइपिंग शाखा के दो लोगों ने साक्षात्कार लिया. राज्यपाल की ओर से इस पर सवाल उठाये गये थे. नियमों को शिथिल कर धड़ल्ले से बहाली की गयी. 40 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों को भी सहायक के रूप में बहाल किया गया. बिहार में रद्द हुई नियुक्तियों के बाद उन लोगों को भी झारखंड में बहाल कर दिया गया. झारखंड विधानसभा ने प्रोन्नति के मामले में भी कीर्तिमान बनाया. एक वर्ष में ही कई लोगों को प्रोन्नत कर दिया.
सीडी सामने आयी, विधानसभा कमेटी ने की जांच
स्पीकर आलमगीर आलम के समय हुई सहायक की नियुक्ति में अनियमितता और पैसे की लेन-देन का मामला सामने आया. तत्कालीन भाजपा विधायक सरयू राय ने यह सीडी विधानसभा को उपलब्ध करायी. इसमें विधानसभा के पूर्व सचिव सीताराम साहनी, प्रशाखा पदाधिकारी मो शमीम और लिपिक बासुकीनाथ पाठक के बीच पैसे की बातचीत का रिकॉर्ड था़ जांच आयोग ने इसे भी आधार बनाया है़ इससे पूर्व राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने भी सीडी की जांच की थी़
साक्षात्कार में बरती गयी अनियमितता
आलमगीर आलम के समय हुई नियुक्ति में प्रक्रिया से लेकर पूरे साक्षात्कार के तौर-तरीके पर सवाल उठे. राज्यपाल की ओर से भी इस पर सवाल उठाया गया. साक्षात्कार में अनियमितता बरते जाने की बात सामने आयी. सेवा शर्त, विज्ञापन एवं नियुक्ति के आवेदन की छंटनी प्रक्रिया में अनियमितता बरती गयी. सैकड़ों सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के लिए केवल दो सदस्यीय बोर्ड गठित किये जाने को लेकर विवाद रहा. पूर्व स्पीकर एमपी सिंह सिंह ने जिनके विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी की थी, उन्हें साक्षात्कार बोर्ड का अध्यक्ष व सदस्य बनाया गया.
बोर्ड सदस्य रहे व्यस्त, तो टंकक ने लिया इंटरव्यू
राज्यपाल के पत्र से कई गंभीर अनियमितता सामने आयी थी. 29 जनवरी 2007 से चले इंटरव्यू में तत्कालीन बोर्ड के अध्यक्ष कौशल किशोर प्रसाद और सोनेत सोरेन विधानसभा सत्र और स्थापना कार्यों में व्यस्त रहने के कारण नहीं रहे, तो उनकी जगह पर टाइपिंग शाखा के तारकेश्वर झा और महेश नारायण सिंह बोर्ड में शामिल हो गये. टंकक ने इंटरव्यू लिया और बोर्ड के सदस्यों ने हस्ताक्षर किया.
पलामू के 70 प्रतिशत लोगों की हुई बहाली
स्पीकर इंदर सिंह नामधारी के कार्यकाल हुई नियुक्तियों में पलामू से सर्वाधिक बहाली हुई. 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग पलामू से अलग-अलग पदों पर भर दिये गये. इन नियुक्ति में प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ. नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं अपनायी गयी.
शमीम नाम का शख्स था सक्रिय
आलमगीर आलम के अध्यक्ष रहते मो शमीम नाम का एक शख्स तब खूब सक्रिय रहा था. श्री अालम के समय ही विधानसभा में चपरासी, माली व फर्राश (चतुर्थ वर्गीय कर्मी) सहित करीब डेढ़ सौ पदों पर बहाली हुई थी. आशंका है कि इसमें मो शमीम ने भी अहम भूमिका अदा की थी.
इस बात की पूरी आशंका है कि महिला कर्मी के बारे में बता रहा वह शख्स कोई और नहीं बल्कि शमीम ही है. इसी मामले में पूछताछ के लिए जांच समिति ने शमीम को बुलाया था, पर वह पटना के किसी पारस अस्पताल से यह सर्टिफिकेट बनवा लाया कि उसका कंठ इतना खराब हो गया है कि वह कुछ बोल नहीं सकता. बाद में मालूम हुआ कि वह बोल सकता है़
नामधारी के समय इन पदों पर बहाली हुई
अनुसेवक 143
प्रतिवेदक 24
वरीय प्रतिवेदक 05
चर्या लिपिक 12
टंकक 08
चालक 15
वाहन पर्यवेक्षक 03
दफ्तरी 02
अभिलेखक वाहक 02
ट्रेजरी सरकार 02
गेस्टेसनर 01
प्रूफ रीडर 02
फैक्स ऑपरेटर 01
फोटो स्टेट 01
ध्वनि नियंत्रक 01
प्रधान महिला सुरक्षा प्रहरी 01
सुरक्षा प्रहरी (पुरुष) 05
आलमगीर आलम के समय हुई बहाली
सहायक 150
चालक 25
माली 14
उप मुख्य उद्यान पर्यवेक्षक 01
दरबान 10
सफाईकर्मी 33
मेहतर 30
निजी सहायक 16
टंकक 16
सुरक्षा प्रहरी (महिला) 10
शोध सहायक सह सूचीकार 06
प्रशाखा पदाधिकारी (उर्दू) 01
उर्दू सहायक 02
उर्दू अनुवादक 01
उर्दू टंकक 02
प्रधान उर्दू टंकक 01
उर्दू रूटीन क्लर्क 01
कंप्यूटर ऑपरेटर उर्दू 01
अनुसेवक उर्दू 01
तीन पूर्व अध्यक्षों व कर्मियों पर दर्ज हो आपराधिक मुकदमा
रांची : विधानसभा नियुक्ति-प्रोन्नति घोटाले की जांच करने वाले रिटायर्ड जस्टिस विक्रमादित्य ने बिहार विधानसभा से हटाये गये उन सात लोगों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की है, जिन्हें बाद में झारखंड विधानसभा में बैक डोर से बहाल कर लिया गया था. इसके अलावा किसी अन्य कर्मी की नौकरी पर कोई खतरा नहीं है. रिपोर्ट की अनुशंसा में सिर्फ गलत तरीके से प्रमोट किये गये कर्मियों को डिमोट करने की बात है.
सूत्रों के अनुसार, आयोग ने इस मामले में नेचुरल जस्टिस का ख्याल रखा है तथा माना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उन लोगों की गलती नहीं, जो चाहे किसी भी तरह से बहाल हुए तथा वहां कार्यरत हैं. वहीं इस मामले में दोषी पाये गये पूर्व विधानसभा अध्यक्षों इंदर सिंह नामधारी, आलमगीर अालम व शशांक शेखर भोक्ता सहित कुछ विधानसभा कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने संबंधी अनुशंसा की बात पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है.
सीडी मामले की सीबीआइ जांच की अनुशंसा : नियुक्ति-प्रोन्नति घोटाले से जुड़े सीडी मामले की सीबीआइ जांच की अनुशंसा की गयी है. घोटाले की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की एक सदस्यीय इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में उक्त सीडी तथा इसके पूरे मामले की सीबीआइ जांच की सिफारिश की है.
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