आस्था और अटूट विश्वास का संगम है खलारी का मनोकामना मंदिर

मनोकामना मंदिर के रूप में विख्यात यह पावन धाम आज क्षेत्र की लोकप्रियता के शिखर पर है.

खलारी. खलारी कोयलांचल के ग्राम करकट्टा स्थित देवी मंडप मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का जीवंत केंद्र बन चुका है. अपनी अलौकिक महिमा के कारण मनोकामना मंदिर के रूप में विख्यात यह पावन धाम आज क्षेत्र की लोकप्रियता के शिखर पर है. कहते हैं कि यहां दिल से मत्था टेकने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता, और इसी विश्वास ने इसे एक साधारण देवी पिंड से उठाकर एक भव्य और जागृत विग्रह के रूप में स्थापित कर दिया है. मिट्टी के कच्चे स्वरूप से शुरू हुआ यह सफर आज आधुनिक भव्यता, चार पीढ़ियों के समर्पण और काशी के विद्वानों की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है. शारदीय नवरात्र हो या चैती नवरात्र, यहां पहुंचने वाले भक्तों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि विकास की चकाचौंध के बीच भी हमारी जड़ें अपनी पुरातन संस्कृति और लोक-आस्था में कितनी मजबूती से जमी हुई हैं.

देवी मंडप मंदिर की मिट्टी से कंक्रीट तक का सफर

जानकार बताते हैं कि ग्राम करकट्टा स्थित देवी मंडप की स्थापना देश की आजादी से भी पूर्व हुई थी. शुरुआत में यह अत्यंत सादगी के साथ मिट्टी से निर्मित था. आजादी के पश्चात भक्तों के सहयोग से इसे कंक्रीट का ठोस स्वरूप दिया गया और मुख्य देवी पिंड का सुंदरीकरण कराया गया. जैसे-जैसे भक्तों की मन्नतें पूरी होने लगीं, लोगों की श्रद्धा और बढ़ती गयी और यह मंदिर मनोकामना देवी मंडप के रूप में प्रसिद्ध होता चला गया. आज यहां खलारी के अलावा आसपास के कई जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

चार पीढ़ियों से पाहन परिवार कर रहा सेवा

मंदिर की पवित्रता को बनाये रखने में पाहन परिवार का अद्वितीय योगदान रहा है. वर्तमान पाहन गणेश पाहन बताते हैं कि वे अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उनके परदादा सदवा पाहन, दादा कर्मा पाहन और पिता कैला पाहन के बाद अब वे खुद देवी मंडप की सेवा में समर्पित हैं. पाहन परिवार की यह चौथी पीढ़ी है, जो मंदिर के हर धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन की साक्षी रही है.

माता की भव्य आरती ने लोगों को एक सूत्र में पिरो दिया

स्थानीय राकेश सिंह बताते हैं कि मंदिर के विकास में आरती की शुरुआत एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई. प्रत्येक शनिवार संध्या को होनेवाली माता की भव्य आरती ने लोगों को एक सूत्र में पिरो दिया, जिसके बाद विधिवत देवी मंडप समिति का गठन हुआ. मंदिर के इतिहास का स्वर्ण अक्षरों में लिखा जानेवाला पल वर्ष 2006 था, जब यहां पहली बार चैती नवरात्र सह सतचंडी महायज्ञ एवं भागवत कथा का आयोजन हुआ, उस समय काशी के पीठाधीश्वर सहित 21 ब्राह्मण, 7 प्रवचनकर्ता और कई सिद्ध संतों का आगमन हुआ था.

देवी मंदिर में स्थानीय दानदाताओं और श्रद्धालुओं की अहम भूमिका रही

मंदिर के वैभव और विस्तार को बढ़ाने में समाज के हर वर्ग का अभूतपूर्व सहयोग रहा है. वर्ष 2023 में मंदिर के मुख्य द्वार का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय दानदाताओं और श्रद्धावानों की अहम भूमिका रही. देवी मंदिर की भव्यता को बढ़ाने में वंशी सेठ और स्व. उपेंद्र सिंह, हरेश सिंह सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों का विशेष योगदान रहा है. इसी गौरवशाली परंपरा को निरंतर जारी रखते हुए, इस वर्ष भी ग्राम करकट्टा स्थित देवी मंडप प्रांगण में वासंतिक नवरात्र महोत्सव सह सतचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां वर्तमान में पूरे जोरों पर हैं.

बॉक्स :::: करकट्टा देवी मंडप में ध्वजारोहण आज, कल निकलेगी भव्य कलश शोभायात्रा

खलारी. ग्राम करकट्टा स्थित प्रसिद्ध देवी मंडप मंदिर प्रांगण में वासंतिक नवरात्र महोत्सव सह सतचंडी महायज्ञ और शिव पुराण महाकथा के भव्य आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. इसी कड़ी में महोत्सव के औपचारिक शुभारंभ हेतु 17 मार्च मंगलवार को सुबह 11:30 बजे मंदिर प्रांगण में विधिवत ध्वजारोहण किया जायेगा. वहीं 18 मार्च बुधवार को प्रातः 7:00 बजे भव्य कलश शोभायात्रा निकाली जायेगी. धूप और गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कमेटी ने यह निर्णय लिया है. मंदिर कमेटी ने तमाम भक्तजनों से विशेष आग्रह किया है कि वे बुधवार सुबह 7:00 बजे से पहले मंदिर प्रांगण में अनिवार्य रूप से पहुंच जायें, ताकि समय पर कलश यात्रा शुरू की जा सके. इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के श्रद्धालु और ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं.

शारदीय व चैत्र नवरात्र में पहुंचती है भक्तों की भीड़

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Author: DINESH PANDEY

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