रांची : जबलपुर स्थित आइसीएआर एआइसीआरपी सरगुजा एवं तिल की राष्ट्रीय परियोजना निदेशक डॉ रजनी बिसेन ने बीएयू परिसर स्थित तेलहन फसल प्रजनक शोध प्रक्षेत्र का भ्रमण किया. तेलहनी फसल पर की जा रही शोध गतिविधियों की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य में तेलहन फसल की खेती की काफी संभावनाएं हैं. यहां की जलवायु और भूमि तेलहन फसल की खेती के लिए काफी उपयोगी है. इसकी उत्पादकता बढ़ाने की काफी संभावनाएं भी मौजूद हैं.
पूरे देश में झारखंड राज्य का सरगुजा उत्पादन में चौथा और तिल उत्पादन में छठा स्थान है. राज्य के चार हजार हेक्टेयर क्षेत्र सरगुजा तथा 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में तिल की खेती की जाती है. उन्होंने कहा कि बीएयू द्वारा सरगुजा की विकसित की गयी दो किस्में पूजा- एक और बिरसा नाइजर तथा सफेद तिल के बीज की राष्ट्रीय स्तर पर काफी मांग है. इन किस्मों को पुन: जारी करने की आवश्यकता है.
