रांची : 20 लोगों पर दर्ज देशद्रोह का मामला वापस लेने की मांग

रांची : पत्थलगड़ी प्रकरण में फेसबुक पर किये गये पोस्ट के आधार पर झारखंड के 20 लोगों (जिनमें कुछ समाजकर्मी, लेखक और सामान्य युवा हैं) के विरुद्ध दायर देशद्रोह के मुकदमे को लेकर 10 व 11 अगस्त को रांची में 74 आंदोलन की उपज छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी से जुड़े रहे लोगों की बैठक हुई. इसमें […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : पत्थलगड़ी प्रकरण में फेसबुक पर किये गये पोस्ट के आधार पर झारखंड के 20 लोगों (जिनमें कुछ समाजकर्मी, लेखक और सामान्य युवा हैं) के विरुद्ध दायर देशद्रोह के मुकदमे को लेकर 10 व 11 अगस्त को रांची में 74 आंदोलन की उपज छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी से जुड़े रहे लोगों की बैठक हुई.
इसमें एक स्वर से देशद्रोह के मुकदमे को गलत और पुलिसिया मनमानी कहा गया. इसे अभिव्यक्ति के अधिकार पर निरंकुश हमला व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन बताते हुए झारखंड सरकार से मांग की गयी है कि तत्काल इन बीस लोगों पर दायर देशद्रोह का मामला वापस लिया जाये.
साथ ही कहा गया कि विनोद कुमार जैसे शांतिमय संपूर्ण क्रांति धारा के साहित्यकार और आदिवासी पक्षीय टिप्पणीकार पर देशद्रोह का मामला हास्यास्पद और जेपी-गांधी धारा का अपमान है़
यह तय हुआ कि जब तक इनके खिलाफ दायर देशद्रोह का मामला वापस नहीं लिया जाता या निरस्त नहीं किया जाता, तब तक इस मांग पर जोर देने व पूरे प्रकरण से आम जनता को अवगत कराने के लिए शांतिमय अभियान चलाया जायेगा. इसमें अन्य संगठनों, मानवाधिकार समर्थक व जागरूक नागरिकों को जोड़ने का भी प्रयास किया जायेगा. एक से पांच सितंबर के बीच किसी दिन रांची में इस मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिवाद कार्यक्रम करने की योजना बनी है.
बैठक में रांची के अलावा धनबाद, जमशेदपुर, गिरिडीह, पटना और गया से हेमंत, विश्वनाथ बागी, प्रियदर्शी, राजेंद्र, श्रीनिवास, मधुकर, कनक, कुमुद, शेषागिरि, कुमार चंद्र मार्डी, कपूर बागी, दीपक रंजीत, विश्वनाथ, अशोक वर्मा, कारु, धरनीधर, मंथन और विनोद कुमार शामिल थे़
देशद्रोह का केस किये जाने की निंदा की : सर्व सेवा संघ (अखिल भारतीय सर्वोदय मंडल) ने झारखंड के 20 लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किये जाने की निंदा की है. संघ के मंत्री चंदन पाल और रमेश पंकज ने खूंटी पुलिस की इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक आैर असंवैधानिक कहा है.
कहा कि देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करनेवालों को इसके प्रावधान के बारे में भी पता नहीं है. क्याेंकि सुप्रीम कोर्ट ने आइटी एक्ट की जिस धारा काे अवैध करार दिया है, उसके तहत भी मामला दर्ज किया गया है. यह न केवल अभिव्यक्ति की संवैधानिक व्यवस्था पर कुठाराघात है, बल्कि शासन की ताकत का गलत इस्तेमाल भी है. मुख्यमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए.
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