इतिहास भी आर्थिक पिछड़ेपन की वजह

एसडीजी मिशन झारखंड का सम्मेलन शुरू, कुलपति डॉ रमेश शरण ने कहा जमींदारी खत्म तो की लेकिन भूमि का सही बंटवारा नहीं हो पाया सिविल सोसाइटी को ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा रांची : विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश शरण का कहना है कि देश के कई राज्य आज भी पिछड़े हैं. […]

एसडीजी मिशन झारखंड का सम्मेलन शुरू, कुलपति डॉ रमेश शरण ने कहा
जमींदारी खत्म तो की लेकिन भूमि का सही बंटवारा नहीं हो पाया
सिविल सोसाइटी को ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा
रांची : विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश शरण का कहना है कि देश के कई राज्य आज भी पिछड़े हैं. इसके पीछे इतिहास भी है. वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक दौर में इतिहास को भी समझना होगा. इतिहास समझेंगे, तो इन इलाकों का पिछड़ापन दूर हो पायेगा. आजादी के बाद हम लोगों ने जमींदारी खत्म तो की, लेकिन भूमि का सही बंटवारा नहीं हो पाया. जिनके पास जमीन थी, वे आज भी अमीर हैं.
डॉ शरण गुरुवार को कांके रोड स्थित विश्वा सभागार में एसडीजी (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल) मिशन, झारखंड के राज्य स्तरीय कंसलटेशन वर्कशॉप में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि विकास प्रो पिपुल होना चाहिए. पिछले कुछ वर्षों से दुनिया के सभी देश आर्थिक राजनीति कर रहे हैं.
इसमें कुछ देश काफी आगे चले गये. कुछ पीछे रह रहे.
ऐसा क्यों हो रहा है. यह भी सोचने की जरूरत है. वेल्थ हंगर लाइफ की भारत और बांग्लादेश प्रमुख निवेदिता वार्ष्णेय ने कहा कि अभी लोग एसडीजी के बारे में नहीं जानते हैं. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी जरूरी है. इसके लिए सिविल सोसाइटी को ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा. कार्यक्रम का संचालन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने कहा कि इससे ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने की जरूरत है. इससे युवाओं में भटकाव भी कम होगा. उनको एक लक्ष्य भी मिल पायेगा. सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचे, इसके लिए सिविल सोसाइटी को काम करना होगा. इस मौके पर कई राज्यों के सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं.
प्रारंभ में सस्मिता जेना तथा एके सिंह ने कार्यक्रम की विषयवस्तु पर प्रकाश डाला. डॉ प्रशांत त्रिपाठी ने रोचक कथा शैली में एसडीजी लक्ष्यों की जानकारी दी. डॉ विष्णु राजगढ़िया, राजपाल और कल्लोल साहा ने झारखंड में एसडीजी के कार्यान्वयन की स्थिति पर प्रकाश डाला.
इस सत्र का संचालन मधुकर ने किया. इस संवाद में राज्य के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ ही अन्य राज्यों के अतिथि शामिल हुए. गुरुवार को द्वितीय सत्र में विभिन्न ग्रुप में एसडीजी के लक्ष्यों को झारखंड में हासिल करने पर चर्चा की गयी. दूसरे दिन रिपोर्ट पेश की जायेगी. इसमें राज्य के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, विकास आयुक्त डीके तिवारी की उपस्थिति में एसडीजी पर अनुशंसा प्रस्तुत की जायेगी.
एसडीजी को लोकप्रिय बनाने पर हुई चर्चा
17 बिंदुओं के साथ बनाया गया था एसडीजी : अमिताभ
ऑक्सफेम इंडिया के सीइओ अमिताभ धर ने कहा कि एसडीजी को लेकर न ही राज्य और न केंद्र सरकार गंभीर है. सितंबर 2015 में न्यूयार्क में आयोजित कार्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री ने बहुत गंभीरता से दुनिया के इस लक्ष्य के लिए काम करने की बात कही थी. इसके बावजूद न ही राज्य सरकार और न केंद्र ने इसे गंभीरता से लिया. पूरे विश्व में उस दौरान 17 बिंदुओं के साथ एसडीजी बनाया गया था. इस दौरान ही राजनीतिक भागीदारी और भ्रष्टाचार को भी शामिल करने की मांग की गयी थी. इसे पूरे विश्व ने यह कहते हुए मानने से इनकार कर दिया कि यह अपने-अपने देश का मुद्दा है.

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