रांची : आप तो शिकायतें करते रहिये मार्केटिंग बोर्ड सुनेगा ही नहीं

कुछ कर्मचारी तो 15 साल से एक ही जगह पर पदस्थापित हैं... रांची : मार्केटिंग बोर्ड सब पर भारी है. बोर्ड को विभिन्न मामले को लेकर कई बार शिकायतें मिली, लेकिन बोर्ड कोई कार्रवाई ही नहीं करता. इसे लेकर सवाल उठने लगा है कि बोर्ड आखिर इन पर क्यों मेहरबान है. बोर्ड में गड़बड़ियों की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 11, 2018 8:20 AM

कुछ कर्मचारी तो 15 साल से एक ही जगह पर पदस्थापित हैं

रांची : मार्केटिंग बोर्ड सब पर भारी है. बोर्ड को विभिन्न मामले को लेकर कई बार शिकायतें मिली, लेकिन बोर्ड कोई कार्रवाई ही नहीं करता. इसे लेकर सवाल उठने लगा है कि बोर्ड आखिर इन पर क्यों मेहरबान है.

बोर्ड में गड़बड़ियों की कहानी अंतहीन हो गयी है. कोई पद परिवर्तित करा कर काम कर रहा है, तो कुछ कर्मचारी 15 साल से एक ही जगह पर पदस्थापित हैं. खास बात यह है कि कई काम निदेशक मंडल के अनुमोदन के बिना ही किये जाते हैं. कई मामलों को लेकर बोर्ड के अध्यक्ष गणेश गंझू ने पत्र भी लिखे. लेकिन बोर्ड कोई कार्रवाई नहीं करता है. इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

इन मामलों से समझें कि कैसे काम कर रहा मार्केटिंग बोर्ड

निगरानी विभाग ने गढ़वा में पदस्थापित राकेश कुमार सिंह को घूस लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था. श्री सिंह जेल भी जा चुके हैं. श्री सिंह वर्तमान में बोर्ड में उप निदेशक (विपणन) के पद पर पदस्थापित हैं.

साथ ही इ-नैम का भी प्रभार दिया गया है. बोर्ड के अध्यक्ष गणेश गंझू ने तत्काल प्रभाव से श्री सिंह को उप निदेशक (विपणन) के पद से हटाते हुए उनके मूल पद बाजार पर्यवेक्षक के पद पर पदस्थापित करने का निर्देश दिया था. विभिन्न बाजार समितियों के कर्मचारी, गढ़वा के व्यवसायी संघ ने भी उनकी शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

पर्षद (मुख्यालय) में पिछले 15 सालों से रामवृक्ष माली व शंभु शरण सिंह पदस्थापित हैं. इनके कार्यकलाप को लेकर कई आरोप लगे हैं, लेकिन अब भी ये आराम से काम कर रहे हैं, जबकि सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण-पदस्थापन के लिए अधिकतम तीन वर्ष का कार्यकाल निर्धारित है.

सुरेश कुमार चौधरी की नियुक्ति 2004 में अनुकंपा के आधार पर चतुर्थ श्रेणी में हुई थी. निदेशक मंडल द्वारा प्रस्ताव को अस्वीकृत करने के बाद भी 2009 में प्रबंध निदेशक के स्तर से पद परिवर्तित करते हुए इन्हें तृतीय श्रेणी के पद पर नियुक्त कर दिया गया, जबकि एक बार अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति होने के पश्चात उसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता है.