हर वर्ष अौसतन 21 दिन ही बुलायी गयी झारखंड विधानसभा

रांची : लोकसभा व राज्यसभा सहित राज्यों की विधानसभाअों के संचालन व इनकी कार्यवाही पर शोध करनेवाली दिल्ली की संस्था पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 से 2016 तक झारखंड विधानसभा हर वर्ष अौसतन 21 दिन ही बुलायी गयी. यह अांकड़े सिर्फ विधानसभा की सीटिंग से संबंधित हैं. इसमें किसी कारणवश विधानसभा […]

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रांची : लोकसभा व राज्यसभा सहित राज्यों की विधानसभाअों के संचालन व इनकी कार्यवाही पर शोध करनेवाली दिल्ली की संस्था पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 से 2016 तक झारखंड विधानसभा हर वर्ष अौसतन 21 दिन ही बुलायी गयी. यह अांकड़े सिर्फ विधानसभा की सीटिंग से संबंधित हैं.

इसमें किसी कारणवश विधानसभा न चलने या इसकी कार्यवाही बाधित होने का समावेश नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक 21 दिन का यह आंकड़ा झारखंड के पड़ोसी राज्यों अोड़िशा, प.बंगाल, बंगाल व छत्तीसगढ़ सहित भाजपा शासित कई राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान की विधानसभा की सीटिंग की तुलना में कम है (देखें चार्ट). जिन कुल 20 राज्यों से संबंधित आंकड़े संस्था के पास उपलब्ध हैं, उनके अनुसार कर्नाटक विधानसभा सबसे अधिक हर वर्ष अौसतन 51 दिन बुलायी गयी. वहीं हरियाणा व त्रिपुरा जैसे राज्यों की विधानसभाएं संबंधित वर्षों के दौरान बेहद कम क्रमश: 14 व 13 दिन ही बुलायी गयी.

राज्य विधानसभा बुलायी गयी
(कार्य दिवस)
कर्नाटक 51
केरल 48
मध्य प्रदेश 38
अोड़िशा 38
प. बंगाल 38
बिहार 37
गुजरात 32
छत्तीसगढ़ 31
हिमाचल 31
तमिलनाडु 29
गोवा 28
राजस्थान 27
उत्तर प्रदेश 27
असम 24
झारखंड 21
मिजोरम 21
दिल्ली 16
उत्तराखंड 16
हरियाणा 14
त्रिपुरा 13
कहां की विधानसभा कितने दिन चली
यह सही है कि विधानसभा के संचालन से विकास कार्यों को गति मिलती है. सरकार अपने आय-व्यय व बजट संबंधी कार्य भी करती है. आम लोगों की बातें भी इस मंच के माध्यम से उठायी जाती है तथा सरकार इस पर जवाब देती है. इस नाते विधानसभा का चलना बेहद महत्वपूर्ण है. हमारी सरकार इसका प्रयास भी कर रही है. चालू वित्तीय वर्ष का बजट सत्र लंबा था. हम अागे भी इसका ध्यान रखेंगे. पर विपक्ष का सहयोग भी जरूरी है. सदन की कार्यवाही में उसकी गंभीरता भी मायने रखती है.
नीलकंठ सिंह मुंडा, ग्रामीण विकास सह
संसदीय कार्य मंत्री
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