झारखंड : मैट्रिक-इंटर का रिजल्ट जून के प्रथम सप्ताह में जारी होगा

अध्यक्ष ने किया मूल्यांकन केंद्र का निरीक्षण, दी जानकारी रांची/जमशेदपुर : झारखंड में मैट्रिक व इंटर (साइंस और कॉमर्स) का परीक्षाफल जून के पहले सप्ताह में जारी होगा. हालांकि झारखंड एकेडमिक काउंसिल की अोर से तैयारी की गयी है कि मैट्रिक की परीक्षा का रिजल्ट 31 मई तक जारी कर दिया जाये, लेकिन अगर किसी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
अध्यक्ष ने किया मूल्यांकन केंद्र का निरीक्षण, दी जानकारी
रांची/जमशेदपुर : झारखंड में मैट्रिक व इंटर (साइंस और कॉमर्स) का परीक्षाफल जून के पहले सप्ताह में जारी होगा. हालांकि झारखंड एकेडमिक काउंसिल की अोर से तैयारी की गयी है कि मैट्रिक की परीक्षा का रिजल्ट 31 मई तक जारी कर दिया जाये, लेकिन अगर किसी कारण से देर हुई, तो हर हाल में जून के पहले सप्ताह में मैट्रिक व इंटर की परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया जायेगा.
यह बातें झारखंड एकेडमिक काउंसिल के चेयरमैन डॉ अरविंद प्रसाद सिंह ने जमशेदपुर में प्रभात खबर से कही. मंगलवार को वे जमशेदपुर में मूल्यांकन केंद्रों का अौचक निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे. मूल्यांकन केंद्र के निरीक्षण के क्रम में उन्होंने कहा कि समय पर व दुरुस्त रिजल्ट देने के लिए जैक कृतसंकल्प है. उन्होंने कहा कि सिर्फ रिजल्ट जारी करना ही जैक का मकसद नहीं है.
रिजल्ट इस प्रकार का जारी हो कि वह त्रुटि रहित हो, ताकि रिजल्ट को सुधरवाने के लिए विद्यार्थियों को जैक कार्यालय का चक्कर ना लगाना पड़े. इस वजह से वे मूल्यांकन केंद्रों पर जाकर स्वयं शिक्षकों से मुलाकात कर रहे हैं अौर उन्हें कह रहे हैं कि कॉपी में जितना अंक है, मार्क्स फाइल पर भी उतना ही अंक चढ़ायें. उन्होंने कहा कि मूल्यांकन में योगदान नहीं करनेवाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी.
हिंदी व मैथ में गड़बड़ सवाल का मिलेगा फूल मार्क्स
जैक चेयरमैन ने मूल्यांकन कार्य में शामिल शिक्षकों को कहा कि मैट्रिक के हिंदी के सवाल नंबर दो में त्रुटि थी, इसलिए निर्णय लिया गया है कि सभी परीक्षार्थियों को उसके आठ नंबर दिये जायेंगे. इसी प्रकार मैथ में ग्राफ से संबंधित सवाल पूछे गये थे, जबकि आंसर शीट में ग्राफ पेपर नहीं दिया गया था. अगर किसी ने साधारण पेपर पर ही अपने से ग्राफ बना दिया है, तो उसे भी फूल मार्क्स मिलेगा
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दो-तीन नंबर से किसी को फेल ना करें
चेयरमैन ने कॉपियों की जांच करनेवाले शिक्षकों को कहा कि आप बच्चों को पढ़ाते हैं. इसके बाद आप ही उनकी कॉपियों का मूल्यांकन भी करते हैं. आप बच्चों के भविष्य निर्माता हैं. निर्णायक की भूमिका में जब आप हैं, तो उनके साथ पूरी न्याय होना चाहिए. कॉपी जांचने के क्रम में यह कभी भी न हो कि किसी बच्चे को 80 अंक आये हैं अौर भूलवश वह 18 हो गया हो. इस प्रकार की गलती होने पर कार्रवाई तय है. पिछले साल इस तरह के कई केस सामने आये थे. उन्होंने कहा कि अगर कोई परीक्षार्थी दो-तीन नंबर से फेल कर रहा है अौर उसे पास करने की गुंजाइश है, तो उसे पास कर दिया जाये.
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