धार्मिक आयोजनों से होती है धर्म की रक्षा : दिलीप कृष्ण

कथा के बाद महाआरती का किया गया आयोजन सैकड़ों महिलाओं ने प्रभु श्रीराम की आरती उतारी कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का भी हुआ आयोजन नामकुम : धार्मिक आयोजनों से धर्म की रक्षा होती है और संस्कार बचा रहता है. समय-समय पर सत्संग, जागरण अौर धार्मिक आयोजन होते रहने चाहिए, ताकि आनेवाली पीढ़ी धर्म […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
कथा के बाद महाआरती का किया गया आयोजन
सैकड़ों महिलाओं ने प्रभु श्रीराम की आरती उतारी
कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का भी हुआ आयोजन
नामकुम : धार्मिक आयोजनों से धर्म की रक्षा होती है और संस्कार बचा रहता है. समय-समय पर सत्संग, जागरण अौर धार्मिक आयोजन होते रहने चाहिए, ताकि आनेवाली पीढ़ी धर्म व संस्कार से विमुख न हो. यह बातें दिलीप कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने कही. वह रामकथा आयोजन समिति चाणक्य नगर द्वारा आयोजित राम कथा के सातवें दिन समापन के दौरान बोल रहे थे.
उन्होंने सबरी चरित्र, भरत चरित्र, वन आगमन, सीता हरण, रावण वध, अयोध्या वापसी व प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक का वर्णन किया. महाराज जी ने कहा कि प्रभु का अवतार जगत में धर्म की रक्षा करने और दुष्टों का नाश करने के लिए हुआ था. जब श्रीराम वनवास के बाद अयोध्या लौटे, तो प्रजा उनकी एक झलक पाने के लिए लालायित थी. कथा के बाद महाआरती का आयोजन किया गया. इसमें सैकड़ों महिलाओं ने प्रभु श्रीराम की आरती उतारी, उनका गुणगान किया.
कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के सफल आयोजन में रामकथा आयोजन समिति के ज्ञान प्रकाश, मनोज सिंह, रामजीत सिंह, प्रमोद कुमार सिंह, अभिषेक कुमार, सीता राम, पीयूष सिंह, व्यास सिंह, रवींद्र कुमार, अवनि भूषण व सुजीत सिन्हा का योगदान रहा.
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