मैथिली साहित्यिक परिसंवाद: रांची विश्वविद्यालय में मैथिली भाषा की पढ़ाई शुरू कराने के लिए करेंगे प्रयास

रांची: साहित्य अकादमी व झारखंड मिथिला मंच के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को चार सत्रों में परिसंवाद और कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के संग पारंपरिक गीत मंगलमै दिन आयल हे, पाहून छथि आयल…से हुई. कार्यक्रम का उदघाटन मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रमेश कुमार पाण्डेय ने किया. उन्होंने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची: साहित्य अकादमी व झारखंड मिथिला मंच के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को चार सत्रों में परिसंवाद और कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के संग पारंपरिक गीत मंगलमै दिन आयल हे, पाहून छथि आयल…से हुई. कार्यक्रम का उदघाटन मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रमेश कुमार पाण्डेय ने किया. उन्होंने अपने उदबोधन में कहा कि साहित्य जीवन की जटिलताओं को दूर करे, क्योंकि वर्तमान समय बहुत भयावह होता जा रहा है. उन्होंने घोषणा की, कि रांची विश्वविद्यालय में मैथिली भाषा की पढ़ाई, जो स्थगित हो चुकी है, पुनः उसे शुरू कराने के लिए वह अपने स्तर से पूरा प्रयास करेंगे.

इस सत्र की अध्यक्षता चंद्रकांत शुल्क पूर्व प्रति कुलपति कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय ने की. उन्होंने मिथिला और मैथिली साहित्य के प्रति उदगार व्यक्त किया. साहित्य अकादमी के विशेष कार्यधिकारी देवेंद्र कुमार देवेश ने अपने स्वागत भाषण में मैथिली साहित्य के संवर्धन में अकादमी की योजनाओं एवं कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला.

परिसंवाद का विषय था समकालीन मैथिली उपन्यास की प्रवृत्ति. मैथिली भाषा परामर्श मंडल साहित्य अकादमी की संयोजिका वीणा ठाकुर ने विषय प्रवर्तन कराया और बीज भाषण अशोक अविचल ने दिया. झारखंड मिथिला मंच के महासचिव संतोष झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ कृष्ण मोहन झा ने किया. कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आलेख पाठ किया गया. सियाराम झा सरस, रमण कुमार झा और रौशन यादव ने अपने-अपने आलेख सुनाये. कार्यक्रम को सफल में साहित्य अकादमी के अधिकारियों के संग झारखंड मिथिला मंच के स्वयंसेवक मनोज मिश्र, संतोष झा, गोपालनंद झा, सतीश झा, कमलदेव मिश्र धीरू, ब्रह्मानंद झा, मोहनजी झा वैदिक, प्रवीण झा, प्रदीप चौधरी, विद्यानंद ठाकुर, निशा झा, अरुण झा, भवेश झा, गगन मिश्र, किशोर झा के संग कई स्वयंसेवक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. कार्यक्रम में रांची दूरदर्शन के पूर्व निदेशक पी के झा एवं आरआरडीए के चीफ इंजीनियर सुरेश पासवान भी उपस्थित थे.

कविता व गीत-गजल की इंद्रधनुषी छटा बिखरी
कार्यक्रम के तीसरे एवं चौथे सत्र में कविता व गीत-गजल की इंद्रधनुषी छटा बिखेरी गयी. कवि सम्मेलन के एक सत्र की अध्यक्षता डॉ इंद्रकांत झा व दूसरे सत्र की अध्यक्षता मिथिला दर्शन के संपादक रामलोचन ठाकुर ने की. डॉ चंद्रमणि झा ने पाग पूजा हमर मैथिली एवं भोर चट्ट-चट्ट सांझ मह-मह कविता सुनायी. अरविंद ठाकुर ने समाधि छल की कब्र, अजित आजाद ने दलान पर पथायल रही खपड़ा, मिथिलेश कुमार झा ने सम्हरी जाऊ भाई, प्रीता झा ने ई त हद अछि कविता सुना कर लोगों की वाहवाही बटोरी. इसके साथ ही शिव कुमार टिल्लू, स्वाति सकांभरि, नरेश कुमार विकल, लक्ष्मण झा सागर, कामिनी, अरविंद ठाकुर, प्रीता झा, सदरे आलम गौहर, रामलोचन ठाकुर, कुमार मनीष अरविंद, डॉ कृष्ण मोहन झा, मिथिलेश कुमार झा, सुरेंद्र नाथ मिश्र ने अपनी रचना का पाठ कर सभी का मन मोह लिया.
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