रामगढ़: चरही ओवरब्रिज के समीप स्थित उत्तरी छोटानागपुर दिशोम जाहेर थान में झरना झारखंड ट्रस्ट व झारखंड आदिवासी दलित मंच के तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह व पारंपरिक वेशभूषा के साथ मनाया गया. इस दौरान आदिवासी समाज के अधिकार, संस्कृति, भाषा व जल, जंगल, जमीन की रक्षा का संकल्प लिया गया.
कार्यक्रम का संचालन बिशुन मुर्मू व दिलीप टुडू ने किया. पूर्व जिला परिषद सदस्य अग्नेशिया सांडी पूर्ति ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का सबसे बड़ा संरक्षक है और जल, जंगल, जमीन उसकी पहचान है. उन्होंने आदिवासी दिवस को आत्मसम्मान व अस्मिता का प्रतीक बताते हुए समाज से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने की अपील की. चरही मुखिया संझली मुर्मू ने प्रकृति संरक्षण पर जोर दिया.
पूर्व मुखिया महादेव सोरेन ने भाषा, संस्कृति व वेशभूषा बचाने में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. झरना झारखंड ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद सोरेन ने युवाओं से परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की. कार्यक्रम से पूर्व सामूहिक वन रक्षा बंधन हुआ. संताल समाज के सैकड़ों लोगों ने पेड़-पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर वन संरक्षण का संकल्प लिया. नायके प्रकाश टूडू ने पेड़ों की कटाई रोकने और अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की.
संताली नृत्य-संगीत ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक संताली नृत्य और ढोल-मांदर की थाप के साथ हुई. रंग-बिरंगे परिधानों में युवक-युवतियों एवं महिला-पुरुषों ने पारंपरिक नृत्य-संगीत प्रस्तुत किया. सात नृत्य मंडलियों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया. सभी मंडलियों के कलाकारों को झरना झारखंड ट्रस्ट की ओर से सम्मानित किया गया.
मौके पर ट्रस्ट के सचिव बिशुन मुर्मू, कोषाध्यक्ष प्रकाश टूडू, दिलीप टुडू, फिलन होरो, विजय हंसदा, लालजी मुर्मू, महादेव हेम्ब्रोम, जॉन हेंब्रोम, शिवराम सोरेन, हेमलाल सोरेन, राजू सोरेन, सहदेव हंसदा, मार्सेल बेसरा, राजू हंसदा, ब्रजेश सोरेन, सूरज बेसरा, रामदेव सोरेन, कांतिलाल हंसदा, अनूप तिग्गा, सूरज हंसदा, सुनील सोरेन, रवि हंसदा, संजय मरांडी, द्रविड़ सोरेन, संदीप मरांडी, अरमान सोरेन, नवीन सोरेन, दीपक प्रजापति, नेमन कुमार सहित अन्य उपस्थित थे.
