उरीमारी से सुरेंद्र प्रसाद की रिपोर्ट
उरीमारी (रामगढ़). बिरसा परियोजना के तहत पोटंगा पंचायत के रस्का टोला के विस्थापित ग्रामीणों ने रास्ता नहीं मिलने के विरोध में आउटसोर्सिंग कंपनी का काम करीब 10 घंटे तक बंद करा दिया. ग्रामीणों का आरोप है कि आउटसोर्सिंग कंपनी ने गांव आने-जाने का रास्ता दोनों तरफ से बंद कर दिया है. इस वजह से ग्रामीणों को आने-जाने में काफी दिक्कत हो रही है.
विस्थापित युवक को काम से हटाने पर भी जताया विरोध
ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी ने गांव के एक विस्थापित युवक को भी काम से हटा दिया था. इसको लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी थी. ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या के बारे में पहले भी कंपनी के अधिकारियों को बताया गया था, लेकिन कोई खास कदम नहीं उठाया गया.
10 घंटे की बातचीत के बाद खत्म हुआ आंदोलन
इसके बाद ग्रामीणों ने शनिवार को मिलकर आउटसोर्सिंग का काम बंद कर दिया. काम रुकने की खबर मिलते ही सीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों से बात की. करीब 10 घंटे तक चली बातचीत के बाद, अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुलझाने का भरोसा दिलाया.
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रास्ता देने और युवक को काम पर रखने पर सहमति
ग्रामीणों को आने-जाने के लिए रास्ता देने और काम से निकाले गए विस्थापित युवक को फिर से नौकरी पर रखने पर सहमति बनी. इसके बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया और आउटसोर्सिंग का काम फिर से शुरू हो गया.
आंदोलन में ये ग्रामीण रहे शामिल
आंदोलन में जुरा सोरेन, जतरू सोरेन, सुखदेव मांझी, मुंशी सोरेन, मोहन सोरेन, गुप्ता सोरेन, मनीराम मरांडी, विजय सोरेन, मुन्ना सोरेन, राहुल सोरेन, राजू सोरेन, जयपाल सोरेन, प्रदीप मरांडी, नरेश टुडू, सुनीता देवी, प्रिय देवी, प्रमिला देवी, किरण देवी, सुष्मिता देवी, अग्नि देवी, जिरवा देवी, संगीता देवी, बिरसी देवी, तालोंमुनि देवी, लालमती सोरेन, टेम्नी देवी और राजंती देवी जैसे कई ग्रामीण मौजूद थे.
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