रामगढ़: NGT के प्रतिबंध के बावजूद दामोदर नदी से बालू उठाव जारी

Ramgarh News: झारखंड के रामगढ़ जिले में एनजीटी के प्रतिबंध के बाद भी पतरातू क्षेत्र में दामोदर नदी से बड़े पैमाने पर बालू उठाव जारी है. लगातार हो रहे अवैध उठाव से नदी पर खतरा मंडरा रहा है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

पतरातू से अजय कुमार की रिपोर्ट

Ramgarh News: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा मानसून अवधि में बालू खनन और उठाव पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में दामोदर नदी के विभिन्न बालू घाटों से बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव जारी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी तटों से ट्रैक्टरों के माध्यम से लगातार बालू निकालकर अलग-अलग जगहों पर स्टॉक किया जा रहा है, जिससे नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है.

सुबह से शाम तक चल रही ट्रैक्टरों की आवाजाही 

मिली जानकारी के अनुसार, पतरातू के कई बालू घाटों पर सुबह से लेकर देर शाम तक ट्रैक्टरों की आवाजाही देखी जा रही है. नदी के बीचों-बीच और किनारे जमा बालू को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर सुरक्षित स्थानों पर डंप किया जा रहा है. बालू का यह स्टॉकिंग काम भविष्य में बिक्री के उद्देश्य से किए जाने की चर्चा है. 

एनजीटी के आदेशों की अनदेखी, पर्यावरण पर खतरा 

स्थानीय लोगों का कहना है कि एनजीटी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नदी क्षेत्र में खनन गतिविधियां बंद नहीं हुई हैं. इससे दामोदर नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित बालू उठाव से नदी की पानी धारण क्षमता प्रभावित होती है, मिट्टी का कटाव की समस्या बढ़ती है और पानी में रहने वाले जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा उत्पन्न होता है. नदी क्षेत्र में कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी दिखाई दे रही हैं, जो बालू उठाव और परिवहन गतिविधियों की ओर संकेत करती हैं. इससे यह सवाल उठ रहा है कि प्रतिबंध के बावजूद यह काम किसकी अनुमति या संरक्षण में संचालित हो रहा है.

जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग 

क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते अवैध बालू उठाव पर रोक नहीं लगी तो दामोदर नदी का पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है. वहीं प्रशासन की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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Published by: Sweta Vaidya

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