प्रगतिशील लेखक संघ के पांचवें राज्य सम्मेलन का समापन, रणेन्द्र बने कार्यकारी अध्यक्ष

रामगढ़ में प्रलेस झारखंड का पांचवां राज्य सम्मेलन संपन्न. नई कार्यकारिणी का गठन, पूंजीवाद और लेखकीय चुनौतियों पर मंथन. जानें कौन बने कार्यकारी अध्यक्ष.

रामगढ़ : प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), झारखंड का दो दिवसीय पांचवां राज्य सम्मेलन रविवार को रामगढ़ में नई राज्य कार्यकारिणी के गठन, वैचारिक विमर्श और काव्य पाठ के साथ संपन्न हो गया. सम्मेलन में साहित्य, संस्कृति, पूंजीवाद, लोकतांत्रिक मूल्यों और समकालीन लेखकीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. सम्मेलन के अंत में 2026-28 के लिए नई राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें कथाकार रणेन्द्र को कार्यकारी अध्यक्ष और प्रो. मिथिलेश को महासचिव चुना गया.

पूंजीवाद के नये स्वरूप और लेखकीय चुनौतियों पर मंथन

सम्मेलन के पहले वैचारिक सत्र का विषय 'इक्कीसवीं सदी में पूंजीवाद का स्वरूप और लेखकीय चुनौती' था. कथाकार रणेन्द्र ने कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पूंजीवाद, तकनीकी सामंतवाद और जैव साम्राज्यवाद जैसे समकालीन मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे. उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में लेखकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है.

कथाकार पंकज मित्र ने कहा कि समय के यथार्थ को पहचानना आज की सबसे बड़ी चुनौती है. लेखक शेखर मल्लिक ने संकट के बीच संभावनाओं की तलाश पर जोर दिया, जबकि शैलेंद्र ने लेखकों से नए प्रश्नों और बदलती परिस्थितियों से संवाद स्थापित करने का आह्वान किया.

प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता पर चर्चा

दूसरे सत्र का विषय 'समय के संकट और लेखन की चुनौती : संदर्भ- प्रेमचंद और समकालीन विमर्श' था. सत्र की अध्यक्षता महादेव टोप्पो ने की. उन्होंने आदिवासी समाज के संघर्ष और उसकी समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया. वक्ता गजेंद्र ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य अपने समय का इतिहास होने के साथ-साथ आज भी आलोचना की महत्वपूर्ण कसौटी है.

नई पीढ़ी के लेखकों से जनपक्षधर लेखन का आह्वान

समापन सत्र में प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने नई पीढ़ी के लेखकों से रचनात्मकता के साथ जनपक्षधरता बनाए रखने की अपील की. इस दौरान दिवंगत कवि प्रवीण परिमल समेत अन्य साहित्यकारों को श्रद्धांजलि देते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया गया. सम्मेलन में अहमद बद्र, प्रो. मिथिलेश, सत्यम, संजय सोलोमन, अर्पिता सहित कई साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया. विभिन्न भाषाओं के कवियों ने काव्य पाठ किया. राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का समापन हुआ.

रणेन्द्र कार्यकारी अध्यक्ष, प्रो मिथिलेश महासचिव

सम्मेलन में वर्ष 2026-28 के लिए नई राज्य कार्यकारिणी का गठन किया गया. संरक्षक मंडल में शशि कुमार, प्रो. रामानंद, जयनंदन और डॉ (मो) जकरिया को शामिल किया गया. अध्यक्ष मंडल में महादेव टोप्पो, प्रो अहमद बद्र, निशी प्रभा और डॉ बीएन ओहदार को जिम्मेदारी मिली. कथाकार रणेन्द्र को कार्यकारी अध्यक्ष, प्रो मिथिलेश को महासचिव, शेखर मल्लिक को उपमहासचिव और डॉ. भारती को कोषाध्यक्ष चुना गया. इसके अलावा उपाध्यक्ष, सचिव मंडल और कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों का भी चयन किया गया.

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By Amleshnandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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