आत्मशुद्धि के लिए तप और संयम के मार्ग पर बढ़ें : मुनिश्री

रामगढ़ में दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की पूजा हुई. मुनिश्री ने इच्छाओं पर संयम और आत्मशुद्धि का महत्व बताया. जानें कैसे पाएं आत्मिक शांति.

रामगढ़. दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन श्री दिगंबर जैन मंदिर रामगढ़ में उत्तम तप धर्म की पूजा भक्तिभाव के साथ हुई. प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही. जिनेंद्र भगवान के अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा. पंडित संदीप शास्त्री के तत्वावधान में अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन की धार्मिक क्रियाएं विधि-विधान से संपन्न करायी गयीं.

मुनिश्री 108 पुण्यानंद जी महाराज ने शांतिधारा संपन्न करायी. पांडुशाला पर विराजमान मुनिसुव्रतनाथ भगवान की अष्टधातु प्रतिमा, चंद्रप्रभ भगवान की प्राचीन प्रतिमा, महावीर भगवान की प्राचीन प्रतिमा एवं तीनों वेदियों पर विराजमान बड़ी प्रतिमाओं पर कलश अभिषेक कराया गया. वहीं श्री पार्श्वनाथ जिनालय रांची रोड में भी अभिषेक, शांतिधारा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए.

प्रथम अभिषेक अशोक जैन, रांची रोड ने किया. शांतिधारा विनोद व अतुल गंगवाल, धूलियान ने की. संध्या आरती विमल व संदीप सेठी परिवार, रांची रोड द्वारा की गयी. मुनिश्री शुभानंद जी महाराज ने कहा कि तप केवल उपवास अथवा शारीरिक कष्ट सहने का नाम नहीं है, बल्कि इच्छाओं और विकारों पर संयम प्राप्त करना भी तप का महत्वपूर्ण स्वरूप है.

उन्होंने उत्तम तप को दैनिक जीवन में आत्मसात करने तथा आत्मशुद्धि एवं संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. दशलक्षण महापर्व के सभी कार्यक्रम मुनिश्री पुण्यानंद जी महाराज, मुनिश्री शुभानंद जी महाराज एवं क्षुल्लकश्री 105 दिव्यानंद जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हो रहे हैं.

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By Sanjay sukla

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