गिद्दी: बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्रों में शुरू की गयी पोषण वाटिका योजना डाड़ी प्रखंड में सवालों के घेरे में है. प्रखंड के 26 आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका विकसित करने के लिए राशि उपलब्ध करायी गयी थी, लेकिन एक साल के भीतर ही कई केंद्रों पर योजना की स्थिति बदहाल हो गयी है. कहीं जमीन के अभाव में वाटिका नहीं लग सकी, तो कहीं सुरक्षा के लिए लगायी गयी जाली चोरी हो गयी. कई केंद्रों में जानवरों ने सब्जियों की फसल भी नष्ट कर दी.
डाड़ी प्रखंड में कुल 82 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं. इनमें से 26 केंद्रों में पोषण वाटिका विकसित करने के लिए पिछले वर्ष प्रत्येक केंद्र को 10 हजार रुपये की राशि दी गयी थी. इस तरह कुल 2.60 लाख रुपये उपलब्ध कराये गये. योजना के तहत वाटिका को तीन वर्षों तक संचालित और सुरक्षित रखना है, लेकिन कई केंद्रों में एक साल के भीतर ही योजना की स्थिति खराब हो गयी है.
चार केंद्रों में नहीं लग सकी पोषण वाटिका
सेनेगड़ा, कुरकुट्टा-1, कुरकुट्टा-2 और रैलीगढ़ा-3 आंगनबाड़ी केंद्रों में जमीन के अभाव या उपलब्ध जमीन के बंजर होने के कारण पोषण वाटिका विकसित नहीं हो सकी. इनमें दो आंगनबाड़ी सेविकाओं ने योजना के लिए मिली राशि वापस कर दी है, जबकि दो अन्य सेविकाओं के बैंक खाते में राशि अब भी पड़ी हुई है.
इस स्थिति ने योजना के क्रियान्वयन और राशि के उपयोग की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिये हैं.
तीन केंद्रों में जाली चोरी, जानवरों ने नष्ट की फसल
जिन केंद्रों में पोषण वाटिका विकसित की गयी है, वहां भी इसकी सुरक्षा बड़ी चुनौती बनी हुई है. पटरंगी-2, हुआंग समेत तीन आंगनबाड़ी केंद्रों में वाटिका की सुरक्षा के लिए लगायी गयी जाली चोरी हो गयी. इसके बाद खुले परिसर में जानवरों ने सब्जियों की फसल को नष्ट कर दिया.
बसकुदरा आंगनबाड़ी केंद्र में बारिश के कारण सब्जियों की फसल पूरी तरह बर्बाद होने की भी बात सामने आयी है. इससे बच्चों को ताजी और पोषणयुक्त सब्जियां उपलब्ध कराने की योजना प्रभावित हुई है.
सेविकाओं ने अपने घर में तैयार की वाटिका
जमीन की समस्या के बीच रबोध के दो आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं ने अपने स्तर से पहल करते हुए अपने घर के परिसर में पोषण वाटिका तैयार की है. इससे सेविकाओं की योजना को धरातल पर उतारने की कोशिश सामने आती है, लेकिन यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपनी जमीन नहीं है, वहां विभाग की ओर से पोषण वाटिका के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गयी.
तीन साल तक करना है संचालन
पोषण वाटिका योजना का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों के आसपास हरी सब्जियां और अन्य पोषणयुक्त खाद्य सामग्री तैयार कर बच्चों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराना है. इसके लिए पिछले वर्ष जिला स्तर से 26 केंद्रों को 10-10 हजार रुपये की दर से कुल 2.60 लाख रुपये दिये गये थे. योजना के तहत केवल वाटिका तैयार करना ही नहीं, बल्कि तीन वर्षों तक उसका संचालन और रखरखाव भी करना है.
ऐसे में एक साल के भीतर ही कई केंद्रों में वाटिका का अस्तित्व खत्म होने से योजना की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
भौतिक सत्यापन की उठी मांग
अब मांग उठ रही है कि डाड़ी प्रखंड के सभी 26 आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित पोषण वाटिकाओं का भौतिक सत्यापन कराया जाये. जिन केंद्रों में वाटिका नहीं लगी है, वहां कारणों की जांच की जाये तथा जिन केंद्रों में जाली चोरी हुई है, वहां सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये. इससे योजना को दोबारा प्रभावी तरीके से धरातल पर उतारा जा सकेगा.
लगातार प्रयास किया जा रहा है : प्रभारी सीडीपीओ
अंचलाधिकारी सह प्रभारी सीडीपीओ कमलकांत वर्मा ने कहा कि कुछ आंगनबाड़ी सेविकाओं ने जगह के अभाव में पोषण वाटिका के लिए मिली राशि वापस कर दी है. केंद्रों में पोषण वाटिका को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है.
