ड्रोन से हवाई खतरों से निपटने को CISF और DFI के बीच समझौता, तकनीकी अनुसंधान व प्रशिक्षण पर रहेगा जोर

सीआईएसएफ ने ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक को मजबूत करने के लिए ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ समझौता किया है. इससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक आधुनिक होगी.

पतरातू (रामगढ़). देश के महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को ड्रोन जैसे हवाई खतरों से और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने महत्वपूर्ण पहल की है. इसी कड़ी में सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच ड्रोन एवं ड्रोन रोधी तकनीक को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

इस समझौते के तहत ड्रोन तथा ड्रोन रोधी तकनीक के क्षेत्र में प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, संयुक्त अभ्यास और तकनीकी अनुसंधान पर खास जोर दिया जाएगा. साथ ही, ड्रोन से संबंधित घटनाओं के विश्लेषण एवं घटनाओं की जांच और सबूत इकट्ठा करने की क्षमता को भी विकसित किया जाएगा. इससे सुरक्षा बलों को हवाई खतरों की पहचान करने और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी.

सुरक्षा में आधुनिक ड्रोन तकनीक का समावेश

सीआईएसएफ इकाई पीवीयूएनएल पतरातू के इकाई प्रभारी कमांडेंट विभु सिंह प्रतिहार ने बताया कि हम सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी), बहरोड़ को ड्रोन एवं ड्रोन रोधी प्रणाली के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है.

इसका उद्देश्य सीआईएसएफ के जवानों को नवीनतम ड्रोन तकनीक, हवाई खतरों की पहचान, निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित करना है. उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से जवानों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने और बदलते सुरक्षा खतरों के अनुरूप तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.

ड्रोन निगरानी: खतरे पहचानने का नया तरीका

कमांडेंट ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सीआईएसएफ देशभर के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में ड्रोन तकनीक का उपयोग निगरानी, खतरे की पहचान एवं प्रशिक्षण के लिए कर रहा है. बड़ी संख्या में सीआईएसएफ कर्मियों को ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है.

उदाहरण के लिए, किसी संवेदनशील हवाई अड्डे या परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास अनधिकृत ड्रोन की गतिविधि तुरंत रेड-फ्लैग करती है, जो संभावित घुसपैठ या निगरानी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल करके ड्रोन का पता लगाया जा सकता है, उसे ट्रैक किया जा सकता है और सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किया जा सकता है.

हवाई खतरों से निपटने की तैयारियां होंगी और मजबूत

सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच हुआ यह सहयोग महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को नई तकनीकी मजबूती प्रदान करेगा. साथ ही, भविष्य में उत्पन्न होने वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ की तैयारियों को और सुदृढ़ करेगा. यह समझौता देश के महत्वपूर्ण ठिकानों को हवाई हमलों से कहीं अधिक सुरक्षित बनाएगा, जिससे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.

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By Ajay tiwari

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