गोला से राजकुमार की रिपोर्ट
जैनामोड़ से ओरमांझी तक बन रही भारतमाला परियोजना अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गयी है. करीब 60 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है. कुछ स्थानों पर जमीन, वन स्वीकृति, अंडरपास और चेंज ऑफ स्कोप से जुड़े कार्य लंबित रहने के कारण पूरी परियोजना के निर्धारित समय पर चालू होने को लेकर संशय है.
ऐसे में शेष कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ तो 2027 में लोगों को पूरी तरह तैयार भारतमाला सड़क की सौगात मिलने की उम्मीद है. परियोजना की निगरानी और निर्माण कार्य को गति देने में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. लंबी और जटिल परियोजना के बावजूद अधिकांश हिस्से का निर्माण पूरा कराया जा चुका है.
वन क्षेत्र, स्थानीय परिस्थितियों और अतिरिक्त निर्माण कार्यों जैसी चुनौतियों के बीच एनएचएआई द्वारा परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयास से सड़क अब अंतिम चरण तक पहुंची है. कोइया गांव के पास टॉल प्लाजा बनाया गया है.
एलिफेंट कॉरिडोर का भी निर्माण होगा
राष्ट्रीय राजमार्ग-320बी के तहत गोला से ओरमांझी के बीच 27.846 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें करीब 23.386 किलोमीटर सड़क तैयार हो चुकी है. वहीं जैनामोड़ से गोला तक 32.16 किलोमीटर के हिस्से में चोपादारु, चक्रवाली और हेमतपुर के आसपास कुछ काम अभी बाकी है. गोला से ओरमांझी के बीच सोटय और कुल्ही चौक के आसपास भी निर्माण कार्य लंबित हैं. चोपादारु से हेमतपुर के बीच वन क्षेत्र से संबंधित स्वीकृति के साथ प्रस्तावित एलिफेंट कॉरिडोर का निर्माण किया जाना है. हाथियों के सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किये जा रहे हैं. यह पहल सड़क निर्माण के साथ वन्यजीव संरक्षण के संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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चेंज ऑफ स्कोप बना चुनौती
परियोजना के दौरान कई स्थानों पर परिस्थितियों में बदलाव और अतिरिक्त निर्माण की आवश्यकता के कारण चेंज ऑफ स्कोप किया गया. इससे मूल योजना में अतिरिक्त कार्य जुड़ गये और परियोजना की समय सीमा प्रभावित हुई. लंबित स्वीकृतियां और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद परियोजना के पूर्ण होने की राह आसान होगी.
तीन जिलों की बदलेगी तस्वीर
कनेक्टिविटी भारतमाला परियोजना पूरी होने से बोकारो, रामगढ़ और रांची के बीच आवागमन काफी सुगम होने की उम्मीद है. वर्तमान में रांची से बोकारो पहुंचने में करीब चार से पांच घंटे लगते हैं, जबकि नई सड़क चालू होने के बाद यात्रा समय घटकर करीब डेढ़ से दो घंटे होने की संभावना है. इससे आम यात्रियों के साथ व्यवसायियों और मालवाहक वाहनों को भी बड़ा लाभ मिलेगा. सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड का प्रावधान स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त सुविधा साबित होगा. इससे गांवों के वाहनों को मुख्य हाईवे पर आने की आवश्यकता कम होगी और तेज रफ्तार यातायात के बीच दुर्घटना की आशंका भी घटेगी.
विकास और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
जैनामोड़-गोला-ओरमांझी सड़क संपर्क मजबूत होने से व्यापार, परिवहन, कृषि उत्पादों की आवाजाही और स्थानीय बाजारों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना का अधिकांश काम पूरा होने के बाद अब निगाहें उन्हीं हिस्सों पर टिकी हैं, जहां निर्माण कार्य बाकी है. यदि चोपादारु, चक्रवाली, हेमतपुर, सोटय और कुल्ही चौक समेत सभी लंबित कार्य पूरे हो जाते हैं, तो भारतमाला परियोजना क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी और विकास की तस्वीर बदलने वाली साबित हो सकती है.
