पतरातू के बाद भदानीनगर में भी पत्रकारों को कहा भला-बुरा, कहा : पुलिस को मीडिया की जरूरत नहीं
भुरकुंडा : रामगढ़ के नये एसपी प्रियदर्शी आलोक ने बुधवार को पत्रकारों के साथ एक बार फिर बदसलूकी की. यह घटना भदानीनगर ओपी क्षेत्र के अमझरिया रेलवे साइट की है. दरअसल नक्सलियों के उत्पात के बाद अमझरिया रेलवे साइट पर पुलिस पिकेट बना है. नये एसपी पहली बार अमझरिया जा रहे थे.
इस जानकारी के बाद भुरकुंडा व भदानीनगर क्षेत्र के पत्रकारों का दल समाचार संकलन के लिए उनके पीछे हो लिया. साइट पर निरीक्षण के लिए पहुंचे एसपी की पत्रकारों ने जब तसवीर ली, तो वे गुस्से में आ गये. समाचार संकलन के मामले में पत्रकारों ने जब अपने कर्तव्य की बात की, तो एसपी आपे से बाहर हो गये. पुलिस के जवानों को आदेश देकर पत्रकारों से कैमरा छीन लिया और फोटो डिलिट कर दिया. फिर कहा कि मीडिया से पुलिस को कुछ लेना-देना नहीं है, बल्कि मीडिया को पुलिस की जरूरत है.
मीडिया का चरित्र मैं अच्छी तरह जानता हूं. इसके पूर्व पतरातू में एसपी ने पत्रकारों को काफी भला-बुरा कहा था. तीन-चार दिन पूर्व निरीक्षण के लिए एसपी पतरातू थाना पहुंचे थे. एसपी से जब पत्रकारों ने मिलने के लिए नेम स्लिप भेजा, तो एसपी ने उसे फाड़ डाला. पत्रकारों से मिलने से सीधा इनकार करने के बाद मौके पर मौजूद पत्रकारों को उन्होंने काफी भला-बुरा कहा. मीडिया की स्वतंत्रता पर लगातार हो रहे हमलों के बीच एसपी के इस तरह के रवैये से पत्रकारों व बुद्धिजीवियों में काफी नाराजगी है. इनका कहना है कि एसपी साहब कलम पर पाबंदी लगाना चाहते हैं, ताकि पुलिस की असफलताओं को छिपा सकें.
रेल कंपनी पर खाना खिलाने का दबाव बना रहे थे एसपी
अमझरिया पहुंचने के बाद एसपी ने सबसे पहले रेल निर्माण कार्य में लगी रॉयल इंफ्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रबंधन पर पुलिस पिकेट में नियुक्त डीएपी के जवानों को खाना खिलाने का दबाव बनाया. प्रबंधन की ओर से बताया गया कि फिलवक्त वे जवानों को खाना दे रहे हैं.
31 दिसंबर तक उनकी ओर से यह व्यवस्था जारी रहेगी. इसके बाद पुलिस डिपार्टमेंट अपनी व्यवस्था खुद करे. इस पर एसपी ने कड़े तेवर में रॉयल इंफ्रा प्रबंधन से कहा कि जब आप खाना खा रहे हो, तो आपकी सुरक्षा में लगे जवानों को खाना खिलाने में क्या एतराज है. एसपी का रूख देख कर प्रबंधन के लोग चुप्पी साध गये. दरअसल यह पूरा वाक्या पत्रकारों के सामने हुआ, जिसकी कवरेज भी पत्रकारों ने की थी. शायद इसी बात पर एसपी साहब का मूड ऑफ हो गया था, जिसके कोपभाजन के शिकार बने पत्रकार.
