उरीमारी : न्यू बिरसा आउटसोर्सिंग परियोजना की सुरक्षा अब एसआइएसएफ के जिम्मे होगी. इसके लिए सीसीएल प्रबंधन ने राज्य सरकार से आग्रह किया था. बताया गया कि पोटंगा में ही एसआइएसएफ की एक कंपनी को तैनात किया जायेगा. तीनों पालियों में एसआइएसएफ खदान में उत्पादन व डिस्पैच समेत अन्य कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालेगी.
एसआइएसएफ बाइक के अलावा चार पहिया वाहन से भी लगातार पेट्रोलिंग करेगी. स्थानीय पुलिस व पोटंगा में स्थित पिकेट पर तैनात जवान भी आउटसोर्सिंग परियोजना को सुरक्षा देने का काम करेंगे. एक माह के अंदर एसआइएसएफ के 110 अधिकारी समेत जवानों को यहां तैनात कर दिया जायेगा. सीसीएल द्वारा पोटंगा में अस्थायी एसी शीट का बैरेक बनाया जायेगा. इसमें शौचालय समेत ऑफिस व वाच टावर भी शामिल है.
सीसीएल द्वारा सर्वे शुरू किया गया है. प्राक्कलन बना कर इसे मुख्यालय भेजा जायेगा. बताया गया कि कैंप 10-12 दिनों में बनकर तैयार हो जायेगा. फिलहाल एसएसबी के 35 जवान और स्थानीय पुलिस खदान को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं. जंगल में भी छापामारी अभियान चलाया जा रहा है.
उग्रवादियों के निशाने पर है परियोजना
न्यू बिरसा परियोजना शुरुआती दौर से ही टीपीसी उग्रवादियों के निशाने पर रही है. इससे पूर्व आशा कंस्ट्रक्शन कंपनी भी उग्रवादियों के निशाने पर रही थी. अब नयी कंपनी आने के बाद सोमवार को उग्रवादियों ने गोलियां बरसाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है.
हाल के दिनों में राजन के जेल जाने के बाद टीपीसी की कमान जगेश्वर गंझू उर्फ जग्गू के हाथों में आने के बाद उसके दस्ते ने लगातार तीसरी बार उरीमारी थाना क्षेत्र में गोलीबारी की घटना को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है. पुलिस टीपीसी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए समय-समय पर छापामारी अभियान चलाती रही है.
