भारत के सामाजिक इतिहास में यादव यानी अहीर समाज की पहचान केवल एक सामाजिक समुदाय के रूप में नहीं, बल्कि कृषि, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और सैन्य परंपरा से भी जुड़ी रही है. भगवान श्रीकृष्ण की कर्मयोग और गोपालन की परंपरा से प्रेरणा लेने वाले इस समुदाय ने अलग-अलग दौर में देश के सामाजिक और आर्थिक जीवन में अपनी भूमिका निभाई है.
रेजांग ला जैसे युद्धों में यादव सैनिकों की वीरता का उल्लेख भारतीय सैन्य इतिहास में मिलता है. इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए यादव समाज के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़ी सरकारी योजनाएं इस समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती हैं.
झारखंड प्रदेश यादव महासभा के प्रधान महासचिव इंद्रजीत कुमार यादव का मानना है कि पिछले वर्षों में पशुपालन, कृषि, पिछड़े वर्गों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई सरकारी पहलों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है.
यादव समाज और पशुपालन: परंपरा से आधुनिक अर्थव्यवस्था तक
यादव समाज का एक बड़ा पारंपरिक आधार पशुपालन और दुग्ध उत्पादन रहा है. ऐसे में पशुधन की उत्पादकता, पशु स्वास्थ्य और डेयरी अर्थव्यवस्था से जुड़ी योजनाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं.
राष्ट्रीय गोकुल मिशन दिसंबर 2014 से लागू है. केंद्र सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य देशी बोवाइन नस्लों का संरक्षण, आनुवंशिक उन्नयन तथा दूध उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना है. योजना में कृत्रिम गर्भाधान नेटवर्क के विस्तार, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, डिजिटल पशुधन मिशन और उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं.
इसका सीधा संबंध उन छोटे और सीमांत किसानों से भी है जिनके लिए पशुपालन आय का महत्वपूर्ण साधन है.
पशुपालकों को KCC से जोड़ने की पहल
किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC को पशुपालन और मत्स्यपालन से जोड़ने के लिए भी विशेष अभियान चलाया गया. पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार डेयरी किसानों तथा पशुपालन और मत्स्य किसानों के लिए KCC सुविधा का विस्तार किया गया है.
इंद्रजीत कुमार यादव के अनुसार, इसका महत्व इसलिए है क्योंकि ग्रामीण पशुपालकों के लिए आसान संस्थागत ऋण उनकी आर्थिक गतिविधियों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ सकता है.
पशुओं की बीमारी से बचाव: FMD टीकाकरण
पशुधन अर्थव्यवस्था में पशु स्वास्थ्य का सीधा असर किसान की आय पर पड़ता है.
केंद्र सरकार के Livestock Health and Disease Control Programme के तहत Foot and Mouth Disease यानी FMD के टीकाकरण के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता का प्रावधान है. सरकार के अनुसार 2024 में देशभर में करीब 44.57 करोड़ FMD वैक्सीन और 1.6 करोड़ ब्रुसेला वैक्सीन दी गईं.
यादव समाज जैसे बड़े पशुपालक समुदायों के लिए पशु स्वास्थ्य की ऐसी योजनाओं का महत्व इसी आर्थिक संदर्भ में देखा जा सकता है.
OBC आयोग को संवैधानिक दर्जा क्यों महत्वपूर्ण है?
पिछड़े वर्गों से जुड़े संस्थागत अधिकारों की चर्चा में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग यानी NCBC का संवैधानिक दर्जा एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
संविधान के 102वें संशोधन अधिनियम, 2018 के बाद NCBC को संविधान के अनुच्छेद 338B के तहत संवैधानिक निकाय का दर्जा मिला. आयोग को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की निगरानी, शिकायतों की जांच और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े मामलों में सलाह देने जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं.
इंद्रजीत कुमार यादव इसे पिछड़े वर्गों से जुड़े संवैधानिक संस्थागत ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखते हैं.
राजनीतिक प्रतिनिधित्व की चर्चा
यादव समाज से जुड़े राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात करते हुए लेख में केंद्र और राज्यों में अलग-अलग समय पर महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर रहे यादव नेताओं का उल्लेख किया गया है.
इनमें राव इंद्रजीत सिंह, भूपेंद्र यादव, अन्नपूर्णा देवी, नित्यानंद राय और रामकृपाल यादव जैसे नाम शामिल हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव भी यादव समाज के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में हैं। जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात का उल्लेख प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक विज्ञप्ति में भी किया गया है.
हालांकि, मूल लेख में नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बताया गया है, जिसे प्रकाशित करने से पहले सुधारना जरूरी है। इसलिए वेब संस्करण में इस दावे को शामिल नहीं किया गया है.
झारखंड: विकास की योजनाओं से बदली तस्वीर?
यादव समाज के मुद्दों के साथ इंद्रजीत कुमार यादव ने झारखंड के विकास को भी अपने लेख का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है.
उनके अनुसार, झारखंड की पहचान भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू और जतरा भगत जैसे आंदोलनकारियों की विरासत से जुड़ी है. ऐसे में राज्य में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, कृषि और कनेक्टिविटी से जुड़े निवेश का सामाजिक महत्व भी है.
रांची से शुरू हुआ आयुष्मान भारत
झारखंड के संदर्भ में सबसे उल्लेखनीय उदाहरण आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) का है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2018 को रांची से PM-JAY की शुरुआत की थी. योजना के तहत पात्र परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने वाले उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है.
यानी रांची केवल योजना के उद्घाटन का स्थान नहीं रहा, बल्कि आयुष्मान भारत की राष्ट्रीय शुरुआत से सीधे जुड़ा शहर बन गया।
देवघर AIIMS और एयरपोर्ट
झारखंड में स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में देवघर AIIMS और देवघर एयरपोर्ट को भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है.
केंद्र सरकार ने 2018 में देवघर में AIIMS की स्थापना को मंजूरी दी थी. प्रस्ताव में 750 बेड का अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और विभिन्न सुपर-स्पेशियलिटी विभागों का प्रावधान था.
इसी दौर में देवघर एयरपोर्ट के विकास को भी मंजूरी दी गई थी. 2018 में प्रधानमंत्री ने AIIMS, एयरपोर्ट और सिंदरी उर्वरक परियोजना सहित कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी.
सिंदरी खाद कारखाना: बंद संयंत्र से दोबारा उत्पादन तक
झारखंड के औद्योगिक इतिहास में सिंदरी का खाद कारखाना लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है.
2018 में इसके पुनरुद्धार की आधारशिला रखी गई और 1 मार्च 2024 को सिंदरी उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया गया. प्रधानमंत्री कार्यालय/PIB के अनुसार संयंत्र के शुरू होने से रोजगार के अवसर और देश के यूरिया उत्पादन में योगदान की उम्मीद जताई गई.
कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए इसका एक पहलू उर्वरक उपलब्धता से भी जुड़ा है.
जनजातीय गौरव और PM-JANMAN
झारखंड की राजनीति और सामाजिक पहचान में आदिवासी विरासत की केंद्रीय भूमिका है. इसी संदर्भ में बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाना और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए PM-JANMAN जैसी योजनाओं का उल्लेख किया जाता है.
इन पहलों का उद्देश्य सड़क, आवास, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाना है.
यादव समाज और झारखंड के लिए एक साथ क्यों महत्वपूर्ण हैं ये मुद्दे?
इंद्रजीत कुमार यादव के लेख की मूल थीम दो स्तरों पर सामने आती है—यादव समाज की पारंपरिक अर्थव्यवस्था और झारखंड का व्यापक विकास.
एक तरफ पशुपालन, डेयरी, किसान क्रेडिट कार्ड और पशु स्वास्थ्य जैसी योजनाएं ग्रामीण आजीविका से जुड़ी हैं. दूसरी तरफ AIIMS, एयरपोर्ट, रेलवे, उर्वरक संयंत्र और आदिवासी विकास योजनाएं झारखंड की आधारभूत संरचना और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी हैं.
इस नजरिए से देखें तो कृषि-पशुपालन से लेकर स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर तक, ग्रामीण और राज्य-स्तरीय विकास के कई मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े दिखाई देते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर इंद्रजीत कुमार यादव ने इन्हीं योजनाओं और पहलों को यादव समाज तथा झारखंड के संदर्भ में रेखांकित किया है.
लेखक: इंद्रजीत कुमार यादव प्रांत मंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, झारखंड प्रधान महासचिव, झारखंड प्रदेश यादव महासभा
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