38 वर्षीय युवा पिथो मार्डी 250 राजस्व गांवों को दे रहे कुशल नेतृत्व

कुछ लोग दिन-रात समाज के उत्थान के बारे में सोचते हैं. उन्हीं में से एक हैं युवा देश परगना पिथो मार्डी. जो 250 राजस्व गांवों को स्वशासन व्यवस्था के तहत अपना नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं.

जमशेदपुर:आज के युवा समाज में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हो रहा है. उनका दृढ़संकल्प और सक्रियता ने विभिन्न क्षेत्रों में नये दिशानिर्देश स्थापित किये हैं. युवाओं ने अपनी जिम्मेदारी को समझा है और समाज के उन्नति के लिए समर्पित हैं. उनकी सक्रिय भागीदारी और समाजसेवा के प्रति उनका समर्पण समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. ऐसे ही एक क्षमतावान व लक्ष्य को हासिल करने वाले एक तेज तर्रार युवा हैं 38 वर्षीय पिथो मार्डी. वे कुचूंग दिशोम के आदिवासी स्वशासन व्यवस्था-माझी परगना व्यवस्था के सर्वोच्च पद देश परगना की पद पर आसीन हैं. वे अपने परगनाइत क्षेत्र में शानदार गवर्नेंस, दूरदर्शिता, उत्कृष्ट सोच, जवाबदेह कार्यशैली, अहम फैसले लेने की त्वरित क्षमता, गंभीरता और मधुर व्यवहार के लिए जाने जाते हैं. उनके नेतृत्व में आदिवासी बहुल इलाकों में सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक व शैक्षणिक क्षेत्र नित नये कार्य किये जा रहे हैं. उनकी दूरदर्शिता, जवाबदेह कार्यशैली और उत्कृष्ट सोच के हर समाज व समुदाय के लोग कायल हैं. देश परगना बाबा पिथो मार्डी राजनगर प्रखंड अंतर्गत के गोविंदपुर (गुमिद) के निवासी हैं. उनके पिता का नाम स्व.आनंद मार्डी व माता का नाम-स्व.साकरो मार्डी है.
मंझले पिता के बाद उसे मिली जिम्मेदारी
कुचूंग दिशोम के देश परगना रामी मार्डी के बाद दिसुआ संताल समाज ने पिथो मार्डी को अपना देश परगना बनाया है. इसी वर्ष 21 जनवरी को सरायकेला जिला के राजनगर प्रखंड अंतर्गत के गोविंदपुर में आयोजित एक सामाजिक सभा मेें परगना दड़ही(परगना पगड़ी) पहनाकर जिम्मेदारी दी गयी थी. वे पूर्व देश परगना रामी मार्डी की भतीजे हैं.
250 से अधिक राजस्व गांव को देते हैं कुशल नेतृत्व
कुचूंग दिशोम (राजनगर प्रखंड, गम्हरिया प्रखंड अंश व सरायकेला प्रखंड अंश)अंतर्गत के 250 से अधिक राजस्व गांव को स्वशासन व्यवस्था-माझी परगना व्यवस्था के तरह शासन-प्रशासन का काम करते हैं. वे कुचूंग दिशोम के अंतर्गत आने वाले चार पीड़- इचा:पीड़, गामदेसाई पीड़, सोसोडीह पीड़ व उकाम पीड़ के परगना के मार्फत से विभिन्न गांव माझी बाबा व नायके बाबा तक अपनी कार्य योजना को पहुंचाते हैं. उनके द्वारा निर्देशित कार्यों को धरातल स्तर पर गांव के प्रमुख माझी बाबा अमलीजामा पहनाने का काम करते हैं.
उत्कृष्ठ शासन-प्रशासन व्यवस्था है स्वशासन व्यवस्था: पिथो मार्डी
कुचूंग दिशोम देश परगना कहते हैं कि स्वशासन व्यवस्था उत्कृष्ठ व्यवस्था है. इसका हर व्यक्ति को सम्मान करना चाहिए. आदिवासी समाज प्रकृति के अनुकूल आचरण करते हैं. यह समाज की सबसे बड़ी अच्छी चीज है. प्रकृति का सम्मान हर समाज व समुदाय को करना चाहिए. आदिवासी समाज हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. आने वाले समय में हर घर में शिक्षित लोगों की तदाद बढ़ेगी. हर घर में सरकारी व गैर सरकारी विभाग के काम करने वाले होंगे. माझी परगना व्यवस्था की ओर से सरकारी व्यवस्था जैसा ही व्यवस्था खड़ा करने का प्रयास हो रहा है. स्वशासन व्यवस्था के तहत सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक उत्थान के उपाय किये जा रहे हैं. वे बताते हैं कि उनकी पूरी टीम अन्य देश परगना, पीड़ परगना, माझी बाबा समेत अन्य स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख के साथ ऐसे कार्य योजना पर काम कर रहा है. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनका यह प्रयास रंग लायेगा.

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Author: Dashmat Soren

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