नौशाद अहमद की रिपोर्ट
पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र के बेनी कला स्थित एक ग्रामीण निजी क्लिनिक में इलाज कराने आयी 35 वर्षीय महिला संध्या देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गयी. क्लिनिक के संचालक द्वारा प्राथमिक उपचार किये जाने के दौरान ही महिला की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गयी थी. आनन-फानन में परिजन महिला को लेकर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे. वहां मौजूद चिकित्सकों ने त्वरित जांच की और महिला को मृत घोषित कर दिया.चिकित्सकों के महिला मानखप गांव निवासी अनिल साव की पत्नी 35वर्ष संध्या देवी बतायी जाती है.
जानकारी के अनुसार संध्या देवी को अचानक पेट में काफी दर्द होने पर परिजन तत्काल बेनी कला गांव में एक ग्रामीण चिकित्सक के पास ले कर पहुंचे, जहां उसका इलाज किया गया, इलाज के कुछ ही देरी के बाद उसकी स्थिति बिगड़ने लगी, परिजनों ने तत्काल उसे अनुमंडलीय अस्पताल में लेकर आये, अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सक ने उसे देखने के बाद मृत घोषित कर दिया. इस संबंध में हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल के स्वास्थ उपाधीक्षक डॉक्टर संजय रवि ने बताया महिला को लेकर कुछ लोग अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन उस महिला की मौत हो चुकी थी. महिला की मौत की खबर सुनते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गयी. अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. हालांकि कानूनी प्रक्रियाओं और पुलिसिया कार्रवाई के झंझट से बचने के लिए परिजन बिना पोस्टमार्टम कराये ही शव को लेकर अपने गांव लौट गये. इस वजह से मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है.
परिजनों ने बताया कि मृत महिला संध्या देवी के पति बाहर में रहकर मजदूरी का काम करता है. इसकी जानकारी उसके पति को नहीं दिया गया है. हुसैनाबाद पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी चंदन कुमार ने बताया की घटना की कोई सूचना नहीं दी गयी है. ग्रामीण निजी क्लिनिकों से जनता त्रस्त क्षेत्र में चल रहे इन अवैध और अनियंत्रित निजी क्लिनिकों के कारण आम जनता को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. घटना रविवार की है. जानकारी के अनुसार इन क्लिनिकों में बिना डिग्री वाले झोलाछाप डॉक्टर बैठते हैं, जो मरीजों को बिना सोचे-समझे हाई डोज एंटीबायोटिक और गलत दवायें दे देते हैं. इससे मरीजों की जान चली जाती है.
गरीब और लाचार ग्रामीणों को डराकर ये क्लिनिक संचालक इलाज और जांच के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं.मरीज की स्थिति बिगड़ने पर भी ये संचालक पैसे के लालच में उसे अपने पास रोके रखते हैं. जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तब मरीज को सरकारी अस्पताल भेज देते हैं, जिससे रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देता है.इन कथित क्लिनिकों में न तो ऑक्सीजन की व्यवस्था होती है और न ही जीवन रक्षक उपकरणों की, जिसके कारण छोटी सी आपातकालीन स्थिति भी जानलेवा बन जाती है.
स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से गरीब हो रहे कालकलवित स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है. हुसैनाबाद और इसके ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से दर्जनों निजी क्लिनिक और झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरी स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद गहरी नींद में सोया हुआ है. विभाग की इसी लगातार अनदेखी और लापरवाही का खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है. बेहतर इलाज की उम्मीद में आने वाले सीधे-साधे गरीब लोग इन फर्जी क्लिनिकों के जाल में फंसकर असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं.
